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गढ़वाल सभा के स्थापना दिवस पर बिखेरी लोक संस्कृति की छटा

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कोटद्वार। गढ़वाल सभा के 11वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने गढ़वाली लोक नृत्य प्रतियोगिता में गढ़वाली संस्कृति की छटा बिखेरी।
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रविवार को बदरीनाथ मार्ग स्थित राजकीय प्रेक्षागृह में आयोजित स्थापना दिवस समारोह का पर्यावरणविद् सच्चिदानंद भारती ने शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि गढ़वाली संस्कृति देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसके बिना भारतीय संस्कृति और धरोहर अधूरी है। गढ़वाल की लोक संस्कृति में मेले, तीज-त्योहार, गीत-नृत्य गहरे बसे हुए हैं। जो इसे जीवंत स्वरूप प्रदान करते हैं। उन्होंने लोगों से गढ़वाली संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए आगे आने की अपील की।
इसके बाद रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ बलूनी पब्लिक स्कूल की छात्राओं ने गणेश वंदना से किया। इसके बाद बलूनी पब्लिक स्कूल, सरस्वती विद्यामंदिर, हैप्पी चिल्ड्रन एकेडमी, शांति वल्लभ मेमोरियल इंटर कालेज, मेहरबान सिंह कंडारी सरस्वती विद्या मंदिर, सिद्धबली पब्लिक स्कूूल, डा. डीसी बुड़ाकोटी पब्लिक स्कूल, क्रेडिल प्ले पब्लिक स्कूल, द स्कॉलर्स होम स्कूल के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
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इस अवसर पर गढ़वाल सभा के अध्यक्ष योगंबर सिंह रावत, उपाध्यक्ष गोविंद डंडरियाल, जनार्दन बुड़ाकोटी, महासचिव डा. पदमेश बुड़ाकोटी, ओमप्रकाश कबटियाल, विकास देवरानी, दिनेश कुकरेती, शशिभूषण अमोली, डा. जितेंद्र नेेगी, डा. रणवीर सिंह चौहान व राकेश नैथानी आदि मौजूद थे।
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