कोटद्वार। वर्ष 2006 में स्वीकृत देवीखाल-जुगरसैंण-फतेहपुर मोटर मार्ग कड़े वन कानूनों के चलते वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया में उलझा है। इससे सात गांवों के लोगों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए पांच से सात किमी की दूरी नापनी पड़ रही है। दो बार के प्रस्ताव को जब वन भूमि हस्तांतरण की अनुमति नहीं मिली तो प्रभावित ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के लिए अपनी नापखेत जमीन देने का प्रस्ताव लोक निर्माण विभाग दुगड्डा को दिया। इस प्रस्ताव पर भी विवाद होने से सड़क निर्माण कार्य खटाई में पड़ा है। लोनिवि के अधिकारियों ने नए प्रस्ताव पर उभरे एलाइनमेंट (संरेखण) विवाद को सुलझाने के लिए अगले महीने गांव में बैठक बुलाने की बात कही है।
जुगरसैंण की ग्राम प्रधान सुमित्रा देवी, हरीश ध्यानी, विनोद भदोला, कैलाश भदोला ने लोनिवि दुगड्डा से जल्द सड़क निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने की मांग की है। कहा कि इस सड़क बनने से पांच गांवों रोहिणी मल्ली, तल्ली, जखमलखोल, मेरूवा, जुगरसैंण, सिसवल गांव, घटाखोली और भदाली तल्ली को सड़क सुविधा मिलेगी। कहा कि सड़क निर्माण के लिए वर्ष 2005-06 में स्वीकृति मिली थी, लेकिन वन विभाग के अधिकारी सड़क निर्माण में तमाम पेच फंसाते रहे। सड़क सुविधा न मिलने से उनके गांवों में विकास ठप हो गया है। बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए 108 सेवा के युग में भी डंडी-कंडी ही एकमात्र सहारा है।
देवीखाल-जुगरसैंण-फतेहपुर मोटर मार्ग के निर्माण के लिए दो बार वन भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव खारिज होने के बाद ग्रामीणों ने अपनी नापखेत की जमीन देने की बात कही थी, लेकिन बाद में सर्वे के दौरान विवाद उत्पन्न कर दिया। अगले महीने फिर से विभाग सड़क के एलाइनमेंट पर सहमति बनाने का प्रयास करेगा। एलाइनमेंट पर सहमति बन जाती है तो सड़क निर्माण की नए सिरे से पत्रावलियां तैयार कर शासन को भेज दी जाएगी।
-न िर्भय सिंह, अधिशासी अभियंता लोनिवि दुगड्डा
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चंद्रमोहन शुक्ला