कोटद्वार। अब पौड़ी जिले के सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में बंजर पड़े खेतों में अखरोट की खेती से ग्रामीणों की आर्थिकी में सुधार होगा। उद्यान विभाग ने अखरोट मिशन के तहत इस योजना को मनरेगा से जोड़ा है। शुरुआत में नैनीडांडा और बीरोखाल ब्लाक केे तीन गांवों में करीब 600 नाली भूमि पर करीब 2000 पौधों का रोपण कर अखरोट की खेती पर कार्य शुरू कर दिया है।
जिला उद्यान विभाग ने अखरोट मिशन के तहत शुरुआत में नैनीडांडा ब्लाक के कसाना पल्ला गांव में 350 नाली भूमि पर 937 अखरोट के पेड़, बीरोखाल ब्लाक के जमरिया गांव की 100 नाली भूमि पर 312 पौधे और सिमखोली गांव की 250 नाली पर 781 पौधे रोपने का काम किया है। उत्तराखंड के चौबटिया रिसर्च सेंटर में तैयार की गई अखरोट की वैराइटी कश्मीर के कागजी अखरोट से बेहतर है। यह पौधा चार से पांच साल में फल देने लगता है।
ये मिलेेंगी सुविधाएं
- उद्यान विभाग देगा निशुल्क अखरोट का पौधा और कीटनाशक।
- ग्रामीणों को मिलेगा तकनीकी प्रशिक्षण।
- पौधरोपण के लिए खोदे जाने वाले गड्ढों के लिए मिलेगी मनरेगा से मजदूरी।
- पौधरोपण क्षेत्र की होगी कांटेदार तार से घेरबाड़।
- पौधों की देखरेख के लिए दैनिक मानदेय पर रखा जाएगा चौकीदार।
क्या कहते हैं अधिकारी
अखरोट मिशन के तहत पौड़ी जिले में जलवायु वाले क्षेत्रों में अखरोट की खेती पर कार्य शुरू किया गया है। चौबटिया सिलेक्शन वैरायटी अखरोट के सकारात्मक परिणाम आ रहे हैं।
-डा. रजनीश सिंह, जिला उद्यान विशेषज्ञ
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