कोटद्वार। प्रदेश सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के दावे तो कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। पौड़ी जिले के सुदूर पर्वतीय क्षेत्र रिखणीखाल ब्लाक के भयांसू गांव की एक गर्भवती महिला को पहले तो चारपाई से रिखणीखाल अस्पताल जे जाया गया। वहां डॉक्टर न होने के कारण उसे समय पर उपचार नहीं मिल सका। इसके कारण उसके बच्चे की गर्भ में ही मौत हो गई। इस घटना से लोगों में आक्रोश है।
ग्राम प्रधान भंयासू दिनेश सिंह नेगी ने बताया कि ग्राम भंयासू निवासी बीना देवी पत्नी महावीर सिंह बिष्ट को प्रसव पीड़ा होने पर गत 25 मार्च 2018 को सड़क सुविधाओं के अभाव के बावजूद चारपाई में लेटाकर रिखणीखाल स्थित सरकारी अस्पताल ले जाया गया। प्रधान ने स्वास्थ्य कर्मियों पर महिला को अस्पताल के अंदर नहीं ले जाने का आरोप लगाया। कहा कि गर्भवती महिला का महिला सफाई कर्मचारी ने अस्पताल के बाहर ही चेकअप किया तथा डाक्टर न होने की बात करते हुए उसको सीधे कोटद्वार ले जाने की सलाह दी। इस बीच करीब ढाई घंटे महिला बिना इलाज के अस्पताल के बाहर तड़फती रही। 108 सेवा की मदद से रिखणीखाल से कोटद्वार आते समय जालीखांद के निकट ही रास्ते में ही महिला ने एक मृत बच्चे को जन्म दे दिया। महिला की बड़ी मुश्किल से जान बच सकी। ग्राम प्रधान ने कहा कि यदि सरकारी हास्पिटल में डॉक्टर मौजूद रहते तो शायद महिला स्वस्थ बच्चे को जन्म देती।
उधर, अस्पताल के इंचार्ज डा. हरेंद्र कुमार ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है। अस्पताल में तैनात डॉक्टर मेडिकल परीक्षा के लिए देहरादून गई थी। उस समय अस्पताल में केवल एएनएम और दंत चिकित्सक मौजूद थी। मामला गंभीर होने के कारण उसे कोटद्वार बेस अस्पताल के लिए रेफर किया गया था।