कोटद्वार। मुजफ्फरनगर, रामपुर तिराहा कांड के 23 वर्ष बाद भी शहीदों को इंसाफ नहीं मिलने से आक्रोशित चिह्नित राज्य आंदोलनकारी समिति ने दो अक्तूबर को काला दिवस के रूप में मनाया। इस अवसर पर उत्तराखंड आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। लोगों ने शहीदों के सपनों के अनुरूप प्रदेश बनाने के लिए संघर्ष करने का संकल्प लिया।
सोमवार को समिति के केंद्रीय संयोजक नंदन सिंह रावत की अध्यक्षता में नजीबाबाद रोड कौड़िया कैंप तिराहा पर कार्यक्रम में वक्ताओं ने राष्ट्रीय दलों पर आंदोलनकारियों के साथ छलावा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर कांड को 23 साल हो गए हैं, लेकिन राष्ट्रीय दालों द्वारा पैरवी नहीं करने से आज तक शहीदों को न्याय नहीं मिल पाया है। जिन सपनों को लेकर आंदोलनकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी वे आज उत्तराखंड राज्य को बने 17 साल पूरा होने के बाद भी अधूरे हैं। आज भी लोग अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। शहीदों के सपनों के अनुरूप प्रदेश को बनाने के लिए एक बार फिर से आज आंदोलन की जरूरत है।
इस अवसर पर महेंद्र सिंह रावत, गोविंद सिंह रावत, कमला शाह, देनेश चंद्र जुयाल, बलवंत सिंह रावत, रामसिंह सैनी, राजपाल सिंह, जीके बड़थ्वाल, शहनाज शमसी, जगदीश राणा, विमल गुसाईं, दलवीर सिंह, राजेंद्र सिंह आदि मौजूद थे।
गुनाहगारों को दंडित करने की मांग को लेकर प्रदर्शन
लैंसडौन। रामपुर तिराहा कांड के गुनाहगारों को दंडित करने की मांग को लेकर चिह्नित राज्य आंदोलनकारियोें ने गांधी चौक में नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया। इस कांड के पीड़ितोें को अब तक न्याय न मिलने से खफा राज्य आंदोलनकारियों ने काली पटटी धारण कर काला दिवस मनाया। आंदोलनकारियों ने कहा कि रामपुर तिराहा कांड को वर्षों हो गए, लेकिन आज तक शहीदों को न्याय नहीं मिल पाया। रामपुर तिराहा कांड के आरोपी आज भी सलाखों की पीछे होने की जगह आजाद घूम रहे हैं। जिन सपनों के लिए शहीदों ने आंदोलन किया था वे आज भी अधूरे हैं।
प्रदर्शनकारियों में राज्य आंदोलनकारी समिति के जिला महामंत्री मनमोहन असवाल, राजेश ध्यानी, महिपाल रावत, संदीप अग्रवाल,मनोज वेदी, विनोद रावत, महाराज सिंह आदि थे।