यमकेश्वर। ग्राम पंचायत सीला में चार साल पहले आपदा में क्षतिग्रस्त रवासन पुल का पुनर्निर्माण न होने से स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है। नदी के उफान पर होने के समय स्कूल के अध्यापक बच्चों को नदी पार करवाते हैं। अत्यधिक बारिश के समय स्कूल के बच्चों को या तो छुट्टी करनी पड़ती है या फिर उफनाई नदी का जलस्तर कम होने का इंतजार करना पड़ता है।
वर्ष 1960 में बने इस पुल से सीला, बनसारी, दालमीसेरा, ठिंगाबाज, काटल, हरसोली, कांडई, कचुंडा, कंडारा, तिमल्याणी, देवराना और किमसार क्षेत्र के लोगों को फायदा हुआ। अगस्त 2014 की आपदा में सीला मोटर पुल के बहने से पुल के दोनों ओर के गांवों के लोगों का सड़क संपर्क ठप हो गया। बरसात में स्थानीय लोगों के साथ ही प्राथमिक विद्यालय सीला, जूनियर हाईस्कूल सीला, हाईस्कूल सीला, आंगनबाड़ी केंद्र सीला और इंटर कालेज चमकोटखाल में पढ़ने वाले बच्चों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करके स्कूल जाना पड़ रहा है।
ग्राम प्रधान सीला आशीष रतूड़ी और क्षेत्र पंचायत सदस्य सीला महावीर सिंह का कहना है कि हर बीडीसी की बैठक में वन विभाग के सामने पुल बनाने की मांग की जाती है, लेकिन कोरे आश्वासन दिए जाते हैं। बरसात में नदी में उतरने के खतरे को देखते हुए बच्चों को अभिभावक स्कूल नहीं भेजते, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।
सीला मोटर पुल के निर्माण के लिए वन विभाग की ओर से 70 लाख रुपये की डीपीआर बनाकर भेजी गई है। शासन से स्वीकृति मिलते ही सीला में पुल का निर्माण करवा दिया जाएगा।
-बिंदरपाल, रेंज अधिकारी लालढांग, लैंसडौन वन प्रभाग।
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