लैंसडौन। सेना के परेड ग्राउंड में कदम से कदम मिलाते हुए देश की रक्षा करने का संकल्प लेकर गढ़वाल राइफल्स के 226 रिक्रूट शनिवार सुबह भारतीय सेना का अभिन्न अंग बने। इस मौके पर 25 इन्फैंट्री डिविजन के जीओसी मेजर जनरल शांतनु दयाल (एसएम, वीएसएम) ने बतौर पुनरीक्षण अधिकारी रिक्रूटों को राष्ट्रीयता और रेजीमेंट की शपथ दिलाई। उन्होंने शपथ दिलाते हुए नवनियुक्त सैनिकों से अपेक्षा की कि वे राष्ट्र और रेजीमेंट की परंपराओं के अनुरूप देश सेवा करेंगे।
पुनरीक्षण अधिकारी ने रिक्रूटों की परेड का निरीक्षण किया और परेड की सलामी ली। परेेड की सलामी लेने वालों में ले. कर्नल विक्रमजीत सिंह भी शामिल थे। पुनरीक्षण अधिकारी ने युद्ध स्मारक में शहीद सैनिकों की प्रतिमा पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी ।
इस मौके पर रिक्रूटों ने शानदार परेड का प्रदर्शन कर दर्शकों की वाहवाही लूटी। अपने लाडलों की परेड देखने के लिए राज्य के कई कोनों से उनके परिजन लैंसडौन छावनी पहुंचे थे। परेड का नेतृत्व राइफलमैन कैलाश सिंह ने किया। सैन्य तौर-तरीकों से रेजीमेंटल पुरोहित सूबेदार शशांक शेखर डिमरी ने राष्ट्रीय ध्वज टोली के साथ जाकर हर रिक्रूट से संकल्प दिलाया कि उन्हें अपने दायित्वों का निर्वहन ईमानदारीपूर्वक और अनुशासित रहकर करना है। राष्ट्रीय ध्वज टोली में सूबेदार अजीत सिंह, नायब सूबेदार नरेंद्र सिंह, नायब सूबेदार पवन सिंह, सीएचएम रोबिन सिंह, सीएचएम राहुल सिंह शामिल थे। इस मौके पर पाइप बैंड की धुनों ने उपस्थित जनसमुदाय समेत सभी में राष्ट्रीयता की भावना का संचार जागृत किया। पाइप बैंड का नेतृत्व सीएचएम विक्रम सिंह ने किया।
बेस्ट रिक्रूट किए गए सम्मानित
लैंसडौन। 34 सप्ताह के कठिन प्रशिक्षण के उपरांत विभिन्न क्रियाकलापों में अग्रणी रहे रिक्रूटों को पुनरीक्षण अधिकारी मेजर जनरल शांतनु दयाल ने पदक और प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। पदक विजेताओं में ओवरऑल परफार्मेेंस के लिए राइफलमैन राजवीर सिंह को स्वर्ण, अंकित सिंह रावत को रजत, अरविंद कुमार को कांस्य पदक प्रदान किया गया। बेस्ट ड्रिल के लिए राइफलमैन कैलाश को पदक प्रदान किया गया। बेस्ट अनुदेशक के लिए नायक दिनेश लाल को प्रशस्ति पत्र, बेस्ट प्लाटून कमांडर का प्रशस्ति-पत्र सूबेदार रंजीत सिंह को दिया गया। चैंपियनशिप बैनर का खिताब एल्फा कंपनी को दिया गया। इसके लिए सूबेदार शरत सिंह को सम्मानित किया गया। इस मौके पर सैन्य अधिकारी, उनके परिवार, सैनिकगण तथा रिक्रूटों के परिजन मौजूद रहे।
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