लैंसडौन। कैंट बोर्ड के उपाध्यक्ष के खिलाफ चार सदस्यों द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के बाद उपाध्यक्ष डा. एसपी नैथानी ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। बोर्ड अध्यक्ष ब्रिगेडियर इंद्रजीत चटर्जी की अध्यक्षता में हुई बोर्ड की बैठक में अविश्वास प्रस्ताव के बाद उपजे नए हालात में नए उपाध्यक्ष के चयन के लिए 17 अक्तूबर को बैठक बुलाई गई है। बताया जा रहा है कि दो महिला सदस्यों ने उपाध्यक्ष पद के लिए दावेदारी जताई है, जिससे चुनाव रोचक होने की संभावना बढ़ गई है।
लैंसडौन कैंट बोर्ड में इन दिनों घमासान मचा है। उपाध्यक्ष एसपी नैथानी के खिलाफ कुल छह में से चार सदस्यों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाए लाने से एक बार फिर चुनाव की नौबत आ गई है। बुधवार की बैठक में उपजे हालात पर मंथन के बाद बोर्ड अध्यक्ष बिग्रेडियर इंद्रजीत चटर्जी ने चुनाव के लिए 17 अक्तूबर की तिथि घोषित कर दी है। कैंट बोर्ड में उपाध्यक्ष के चयन के लिए निर्वाचित 6 सदस्य मतदान करते हैं। पिछले चुनाव में चार सदस्यों राजेश ध्यानी, सुमित्रा नेगी, इंद्रा रावत ने डा. एसपी नैथानी के पक्ष में मतदान किया था, बाकी दो सदस्यों दिनेश रावत तथा राजेंद्र राना ने बैठक का बहिष्कार किया था। अब तक नए उपाध्यक्ष के लिए सभासद इंद्रा रावत के नाम की चर्चा चल रही थी, इस बीच दूसरी महिला सभासद की दावेदारी से उपाध्यक्ष का चुनाव रोचक हो गया है।
बुधवार को अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद डा. एसपी नैथानी ने अध्यक्ष को पत्र देकर कहा कि एक महिला सदस्य सुमित्रा स्टेशन से बाहर है, ऐसे में कैंट प्रशासन केे चुनाव के लिए समय देना चाहिए। उन्होंने पर्यटन और कैंट नगरी लैंसडौन में बीते तीन साल के वातावरण का जिक्र किया है। कहा कि सेना और सिविल के संबंध अच्छे रहने चाहिए।
चार दिन में बदला घटनाचक्र
कैंट बोर्ड के चार सदस्यों दिनेश रावत, इंद्रा रावत, राजेश ध्यानी, राजेंद्र राना ने मंगलवार को कैंट बोर्ड के सीईओ के समक्ष उपाध्यक्ष डा. एसपीे नैथानी के खिलाफ अविश्वास पत्र सौंप कर नए उपाध्यक्ष के चुनाव कराने की मांग की थी। सभासदों ने वर्ष 2013 में हुए चुनाव का जिक्र करते हुए बताया कि तब उपाध्यक्ष पद के लिए दो उम्मीदवार मैदान में थे। बाद में दोनों उम्मीदवारों डा. एसपी नैथानी तथा राजेश घ्यानी के मध्य हुए समझौते के तहत ढाई - ढाई साल की अवधि के लिए उपाध्यक्ष बनना तय हुआ था। सभासद राजेश ध्यानी का आरोप हैं कि डा. नैथानी अपने वायदे से मुकर गए हैं और उन्होंने ढाई साल की अवधि की समाप्ति के बाद भी उनके लिए पद रिक्त नहीं किया। डा. नैथानी की वायदा खिलाफी के विरोध में उन्होंने अपना समर्थन वापस लेने की बात कही। इसके बाद तीन और सदस्यों इंद्रा रावत, दिनेश रावत, राजेंद्र राना ने भी उपाध्यक्ष के प्रति अपना अविश्वास जताते हुए दो दिन पूर्व ही अपना अविश्वास पत्र सीईओ को सौंप दिया था।