लैंसडौन। छावनी परिषद और सेना के मध्य आपसी खींचतान की गाज आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों पर पड़ी है। छावनी परिषद ने नगर की सफाई व्यवस्था का जिम्मा संभाल रहे 25 आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों को सोमवार को बाहर का रास्ता दिखा दिया। निकाले गए आउटसोर्स सफाई कर्मियों ने छावनी की सीईओ से वार्ता कर समस्या का समाधान निकालने की मांग की।
छावनी परिषद ने सोमवार को अस्थायी कर्मचारियों को बिना नोटिस दिए ही बाहर का रास्ता दिखा दिया। क्षुब्ध आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों ने छावनी सदस्य दिनेेश रावत, राजेश ध्यानी व राजेंद्र राना के नेतृत्व में कैंट बोर्ड के सीईओ भूपति रोहित से उनके कार्यालय में मुलाकात कर वार्ता की। सफाई कर्मियों ने कहा कि चार माह पूर्व ही उन्हें छावनी परिषद ने एक वर्ष के लिए नियुक्त किया था। बीच में ही उन्हें निकालने से उनके परिवार के समक्ष भूखे मरने की नौबत आ जाएगी। उन्होंने सीईओ से समस्या का हल निकालने की मांग की। सीईओ ने कहा कि सेना की ओर से सफाई कर्मचारियों के मामले में कुछ शर्तें लगाई गई हैं। उन शर्तों का अध्ययन किया जा रहा है। इस मामले में रक्षा संपदा विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का भी अध्ययन किया जा रहा है। उम्मीद जताई कि जल्द ही इस समस्या का समाधान निकल जाएगा। छावनी के प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि ईपीएफ ऑनलाइन उनके खातोें में जमा हो चुका है। वार्ता में प्रशासनिक अधिकारी अनिल बौंठियाल, सफाई निरीक्षक दीपक मिश्रा, सफाई कर्मचारियों की ओर से राहुल, सोनू, मोनू, अमित व अरुण आदि ने हिस्सा लिया।