कोटद्वार। कार्बेट पार्क का कोटद्वार स्थित उत्तरी द्वार देश और दुनियाभर के पर्यावरण और वन्यजीव प्रेमी पर्यटकों की मेजबानी के लिए पलक पावड़े बिछाए तैयार है। सीएम की घोषणा के अनुसार जल्द ही कोटद्वार से दो नए द्वार मैदावन-लोहाचौड़ और सोना नदी वाइल्ड लाइफ का पाखरौ-मोरघट्टी पर्यटन जोन भी पर्यटकों के लिए खोलने की तैयारी है, लेकिन वतनवासा-हल्दूपड़ाव पर्यटन जोन पर्यटकों से गुलजार चल रहा है, जहां वन डे विजिट के साथ ही पर्यटकों को हल्दूपड़ाव डाक बंगले में रात्रि विश्राम की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
बाघों की दहाड़ और हाथियों की चिंघाड़ सुनने को बेताब पर्यटक अब रामनगर से ढिकाला और बिजरानी जोन के साथ ही अब कोटद्वार का रुख करने लगे हैं। कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) में कार्बेट नेशनल पार्क के साथ ही कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग पड़ते हैं। विश्व प्रसिद्ध सीटीआर के कोटद्वार स्थित द्वार को कार्बेट के उत्तरी द्वार के नाम से भी पहचान मिलने लगी है। इसमें खास बात यह है कि कार्बेट नेशनल पार्क में अब सैलानियों को कोटद्वार से भी सैर की सुविधा हासिल हो गई है। पर्यटकों को मैदावन-लोहाचौड़ और सोनानदी वाइल्ड लाइफ के पाखरौ-मोरघट्टी जोन के विधिवत खुलने का कुछ इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन वे वर्तमान में कोटद्वार से सेंधीखाल होते हुए वतनबासा गेट से सीटीआर में प्रवेश कर सकते हैं, जहां वन विभाग की ओर से हल्दूपड़ाव बंगले में रात्रि विश्राम की सुविधा भी मुहैया कराई जा रही है। इसकी बुकिंग ऑनलाइन की जा रही है।
कार्बेट पार्क समेत संपूर्ण सीटीआर में अब तक नैनीताल जिले के रामनगर से ही पार्क में प्रवेश का एकमात्र रास्ता था। 27 नवंबर को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कोटद्वार से दो नए पर्यटन जोन बनाने की घोषणा के बाद वतनबासा-हल्दूपड़ाव पर्यटन जोन में पर्यटकों की चहलकदमी बढ़ने लगी है। कार्बेट रिसेप्शन सेंटर कोटद्वार के प्रभारी वन आरक्षी रवींद्र देव जखवाल बताते हैं कि हर दिन बीस से पच्चीस लोग वतनवासा-हल्दूपड़ाव जोन और जंगल सफारी के बारे में जानकारी ले रहे हैं। बृहस्पतिवार को भी आठ पर्यटकों का दल हल्दूपड़ाव के लिए रवाना हुआ है।
जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुमन कोटनाला कहते हैं कि कोटद्वार स्थित कार्बेट के उत्तरी द्वार को पहली बार इतना प्रचार मिला है। पहली बार कोटद्वार से पर्यटक जंगल सफारी (जिप्सी) का लुत्फ उठा सकते हैं। उनका कहना है कि मैदावन-हल्दूपड़ाव और सोनानदी सेंचुरी के पाखरौ-मोरघट्टी पर्यटन जोन की सैद्धांतिक सहमति प्राप्त हुई है। विधिवत मंजूरी मिलने और ट्रेक विकसित करने के बाद यह भी पर्यटकों के लिए खोल दिए जाएंगे।