यात्रा सीजन में जयकारों से गूंजने वाली केदारघाटी में इन दिनों मरघटी सन्नाटा है। घाटी की फिजाओं में लाशों की दुर्गन्ध बस सी गई है।
आलम यह है कि सड़ती लाशों से फैल रही दुर्गन्ध हजारों फीट ऊपर उड़ान भरने वाले हेलीकाप्टर के पायलट को भी महसूस हो रही है। घाटी में बीते दस दिन से उड़ान भर रहे आर्मी एविएशन के पायलट दुर्गम परिस्थितियों में जिंदगियां तलाश रहे हैं।
205 आर्मी एविएशन स्क्वार्डन (दस्ता) शुक्रवार को गढ़ी स्थित हेलीपेड पर पहुंचा। साथी सैनिकों की हेलीकाप्टर क्रैश में हुई मौत पर श्रद्धांजलि देने आए पायलटों ने बताया कि हालात बेहद खराब रहे।
मेजर रैंक के एक पायलट ने कहा कि हम एडवांस लाइट हेलीकाप्टर गौचर से केदार घाटी और बदरीनाथ में आपरेट कर रहे हैं। बेशक नीचे उतर कर तबाही का मंजर हमने नहीं देखा लेकिन कई फीट ऊंचाई से ही महसूस हो जाता है कि नीचे स्थिति क्या होगी। वेली से गुजरते वक्त लाशों की दुर्गन्ध ऊपर हेलीकाप्टर में महसूस होती है।
उन्होंने कहा कि वेली में उड़ान मुश्किल नहीं है। लेकिन वहां हेलीपेड न होने से रेस्क्यू आपरेशन काफी समय तक प्रभावित रहा। एक पायलट ने बताया कि जंगलचट्टी पर हेलीपेड तो है।
लेकिन उसपर लैडिंग और टैक आफ बेहद मुश्किल रहा। ऐसी स्थिति में क्षमता से कम लोगों को ही उड़ा कर निकाल पाए। पैराट्रपर्स और सैनिकों की जांबाजी की दम पर ही ऐसे कठिन हालात में केदारघाटी से हर जिंदा व्यक्ति को निकालकर हेलीपेड तक ला पाए।
टीम का नेतृत्व कर रहे कर्नल रैंक के अधिकारी ने बताया कि विषम परिस्थितियों के बीच हर दिन कई उड़ान के बाद जब किसी को बचाकर लाते थे तो सारी दिक्कतें छू मंतर हो जाती थी। मौत के मुंह से लोगों को निकाल लाने का अहसास किसी जीत से कम नहीं।
श्रद्धाजंलि कार्यक्रम खत्म हुआ तो आर्मी एविएशन का स्क्वार्डन एक बार फिर से इस उम्मीद के साथ गौचर की ओर उड़ गया कि कुछ और जिंदगियां बच जाए।