उत्तराखंड के प्रसिद्ध मंदिर केदारनाथ धाम के कपाट आज विधि विधान से बंद कर दिए। मंदिर के रावल ने गृभ गृह में पूजा कर इस प्रक्रिया को संपन्न करवाया। इसके बाद पंचमुखी मूर्ति को बाहर निकाल कर उसका श्रंगार किया गया।
प्रथम पड़ाव पहुंचेगी डोली
पूजा के बाद डोली केदारनाथ धाम से आठ बजे प्रस्थान कर अपने प्रथम पड़ाव रामपुर पहुंचेगी। इसके बाद गुप्तकाशी में डोली की पूजा अर्चना की जाएगी।
14 मई को खुले थे कपाट
इस वर्ष बाबा केदार मंदिर के कपाट 14 मई को ग्रीष्मकाल में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खुले थे। प्राचीन परंपरानुसार, केदारनाथ मंदिर के कपाट भैयादूज के मौके पर बंद होते हैं। मंगलवार को कपाट बंद होने से पूर्व भोले बाबा के स्वयंभू ज्योतिर्लिंग को समाधि रूप दिया जाएगा। मंदिर के गर्भगृह में विशेष समाधि पूजा के साथ लिंग को भस्म से ढका जाएगा।
समिति और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। पूजा-अर्चना के पश्चात बाबा की डोली गद्दीस्थल को प्रस्थान करेगी। प्रथम पड़ाव में डोली रामपुर और द्वितीय पड़ाव में डोली छह नवंबर को विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी में विश्राम करेगी। सात नवंबर को डोली सुबह आठ बजे प्रस्थान करेगी।