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बाबा केदार के गुरु भी छोड़ गए धाम

Tue, 02 Jul 2013 07:59 AM IST
विजय लक्ष्मी भट्ट
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केदारनाथ में आए जलप्रलय से न केवल भारी जन धन की हानि हुई, बल्कि इसमें भगवान भी खुद को नहीं बचा पाए। केदारनाथ मंदिर के परिक्रमा पथ में स्थित ईशानेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर और गणपति केदार की पत्थर से बनी भव्य मूर्ति ने भी जलसमाधि ले ली है।
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कुछ भी नहीं बचा मंदिर में
16-17 जून को आई जलप्रलय से केदारनाथ मंदिर और इसके गर्भगृह में स्थित ग्यारहवें ज्योंर्तिलिंग को छोड़कर कुछ भी नहीं बचा। इस हिमालयी सुनामी में भारी जानमाल का नुकसान तो हुआ ही केदारनाथ मंदिर के समकालीन कई मंदिर और पौराणिक स्थल भी जल प्रलय की भेंट चढ़ गए हैं।

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केदारनाथ मंदिर की मुख्य इमारत तो बच गई उसके साथ ही लगा ईशानेश्वर मंदिर भी पूर्णरूप से बह गया है। ईशानेश्वर महादेव को केदारनाथ का गुरु कहा जाता है। श्रीबदरी-केदार मंदिर समिति के पूर्व उपमुख्य कार्याधिकारी जेपी नंबूरी ने बताया कि ईशानेश्वर का मंदिर पांडवकालीन शैली में बना हुआ था।
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भगवान ईशानेश्वर का विवरण ताम्रपत्र पर भी मिलता है। भगवान केदारनाथ के दर्शन के बाद ईशानेश्वर महादेव का जलाभिषेक करने की परंपरा थी, लेकिन अब न ईशानेश्वर हैं और न ही उनका मंदिर।

जल प्रलय में ली समाधि
केदारनाथ मंदिर के पीछे की ओर गणपति केदार की भी भव्य मूर्ति थी। परिक्रमा पथ में स्थित गणपति केदार की मूर्ति ने भी जल प्रलय में जल समाधि ले ली है। बाबा के द्वारपाल श्रृंगी और भृंगी भी बाढ़ में बह गए हैं। केदारनाथ में आज कुछ है तो केवल सन्नाटा और तबाही का मंजर। अब धाम में केवल बाबा और उनके वाहन नंदी ही रह गए हैं।

ईशानेश्वर महादेव के मंदिर की स्थापनापांच हजार वर्ष पूर्व राजा जन्मेजय ने की थी। केदारनाथ मंदिर के साथ ही इसका भी जीर्णोद्धार हुआ था। मंदिर में लिंग के अलावा कृष्ण और पांचों पांडवों की बेशकीमती प्राचीन मूर्तियां स्थापित थीं।बाढ़ में मंदिर बह गया है। इसके निरीक्षण के बाद परंपरानुसार पुनर्निर्माण पर विचार किया जाएगा।
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- भीमाशंकर लिंग, केदारनाथ मंदिर के रावल
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