उत्तराखंड के दून अस्पताल में पहचान के अभाव में ही अठखेलियां करती नन्हीं परी की कहानी बेहद दुःखभरी है। अब जबकि उसको पहचानने वाले पंहुच गए तो मासूम की जिंदगी से जुड़ा एक और कड़वा सच सामने आ गया।
दून अस्पताल में भर्ती आपदा पीड़ित बच्ची ज्योति उर्फ ‘नन्ही परी’ के पिता साधु थे, वे कहीं बाहर से आए थे और टिहरी गढ़वाल के गांव बागवान में रह रहे थे। ट्रक दुर्घटना में साधु की मौत हो गई।
गुरुवार को यहां आए बागवान के लोगों ने ज्योति को पहचान लिया, हालांकि वे उसके पिता का नाम नहीं जानते। इससे पहले लेखपाल ने अपनी रिपोर्ट में ज्योति के पिता का नाम स्व. दिनेश चौहान बताया था।
लोगों ने बताया कि ज्योति का अब कोई रिश्तेदार नहीं है। बागवान के लोगों ने ज्योति को अपने पास रखने या गोद लेने से इंकार कर दिया है। जिलाधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया कि इस मामले में विधिक राय लेकर नियमानुसार काम किया जाएगा।
बागवान से दुकानदार सरोजनी देवी, रामचंद्र और खच्चरवाला शूरवीर सिंह तडियाल को ज्योति की पहचान के लिए नायब तहसीलदार सुरेंद्र कुमार लेकर आए थे।
ज्योति के पिता कहां से आए थे? इसकी जानकारी किसी को नहीं है। बच्ची गढ़वाली के बजाए अवधी भाषा ज्यादा अच्छी तरह समझती है। एडीएम वित्त झरना कमठान और जिला सूचना अधिकारी अजय मोहन सकलानी बागवान के लोगों को लेकर दून अस्पताल गए।
लोगों को देखकर ज्योति ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की, लेकिन जब वे जाने लगे तो रोने लगी। लोगों का कहना था कि बच्ची उनकी दुकान पर आती-जाती थी। इससे पहले देवप्रयाग के पटवारी सत्येंद्र टमटा ने रिपोर्ट दी थी कि ज्योति की मां उसके जन्म के बाद से लापता है।
बागवान के मुर्गी फार्म में वह बिलोरानी नामक महिला के साथ रहती थी। उसके पिता स्व. दिनेश चौहान थे। बिलोरानी ज्योति को लेकर केदारनाथ गई थीं, जहां उनकी मौत हो गई।