नेलांग-जादुंग के आगे चीन से लगी सीमा पर तैयारियों के लिहाज से भारत कुछ पिछड़ रहा है।
चीन ने जहां भारत की सरहद तक शानदार सड़कें तैयार कर ली हैं, वहीं सड़क की कौन कहे, अपनी ही अग्रिम चौकियों तक पहुंचना भारतीय फौजियों के लिए दुष्कर साबित हो रहा है।
चीन ने सीमावर्ती दर्रों के पास तक भारी वाहनों की आवाजाही लायक सड़क कब की तैयार कर ली है। दूसरी ओर, भारतीय सेना के लिए नीलापाणी से मुनिंगला पास 34 किलोमीटर सहित टी सांचकुला व थागला पास के लिए 22 किलोमीटर सड़क के प्रस्ताव अभी सर्वेक्षण की अनुमति लेने तक ही आगे बढ़ पाए हैं।
पैदल मार्ग की स्थिति यह है कि फौज का भारी हथियारों को लेकर जाना तो दूर खाली हाथ पहुंचना भी मुश्किल हो रहा है।
सूत्रों के अनुसार चीन वर्षों पूर्व भारतीय सीमा क्षेत्र टी सांचकुला से दो किलोमीटर थागला एक से चार किलोमीटर तथा मुनिंगला से तीन किलोमीटर झील के पास भारी वाहनों लायक सड़क तैयार कर चुका है।
गंगोत्री नेशनल पार्क की बंदिशों के कारण भारतीय सीमा क्षेत्र की स्थिति यह है कि उत्तरकाशी से 90 किलोमीटर गंगोत्री की ओर भैरौंघाटी से अलग हुई सीमावर्ती सड़क 42 किलोमीटर नीलापाणी तक ही बन पाई है।
यहां से रॉकीनाला होते हुए 5632 मीटर ऊंचाई वाले मुनिंगला दर्रे के लिए 34 किलोमीटर मोटर रोड बननी है। अग्रिम चौकियों को जोड़ने वाली सड़क से पीडीए मंडी से टी सांचकुला 10 किलोमीटर तथा सुमला से 5030 मीटर से 5856 मीटर की ऊंचाई से गुजरने वाले थागला 1 व थागला 2 दर्रे की ओर से 12 किलोमीटर सड़क का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में पड़ा है।
सोनम से पीडीए तक 12 किलोमीटर सड़क की कटिंग ही हो पाई है। अभी इस पर यातायात लायक स्थिति नहीं है। सबसे बड़े दर्रे थागला 1 व 2 को जाने वाली पगडंडी का 12 किलोमीटर हिस्सा बेहद संकरा है।
2 किलोमीटर में तो पेट्रोलिंग पर जाने वाले जवानों को 1 फिट से कम चौड़ाई के चट्टानी रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। यहीं पर टेबिल टॉक के आगे 7 किलोमीटर पैदल रास्तों पर चट्टान व पत्थरों पर निशान देखकर ही आगे बढ़ा जा सकता है।
भेज दिया सड़क का प्रस्ताव
चीन की सीमा तक सड़क पहुंच बनाने के लिए नीलापाणी से मुनिंगला मंडी से टी सांचकुला तथा सुमला से थागला 56 किलोमीटर सड़क के सर्वे कराने का प्रस्ताव नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड को मार्च माह में संस्तुति के साथ भेजा गया है। सड़कों को पक्की करने के लिए 3 स्टोन क्रेशर का प्रस्ताव भी भेजा गया है।-जीएन यादव, निदेशक गंगोत्री नेशनल पार्क