प्रखंड के धार तोंदला गांव के सात लोग केदारनाथ
त्रासदी के शिकार हुए हैं। गांव के लोग केदारनाथ में होटल में काम करने और
खच्चर चलाने के लिए जाते है।
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छह
माह खूब मेहनत कर सालभर की गुजर-बसर का सामान जोड़ लेते थे। गांव के विजय
दर्शन और उसका भाई सुदर्शन रामबाड़ा में होटल चलाते थे। इस बार केदारनाथ
जाते समय विजय दर्शन के 11 साल के बेटे मनीष ने भी साथ जाने की जिद्द की।
बहुत समझाने पर भी नहीं माना, तो वे उसे साथ ले गए। सुदर्शन सिंह का 15 वर्षीय बेटा राहुल भी साथ गया था।
विजय
दर्शन ने बताया कि सीजन में एक महीना कब कटा पता नही लगा, यात्रियों की
आमद बढ़ी तो काम भी बढ़ गया। 16 जून की रात काफी यात्री खाना खा चुके थे।
बाहर तेज बारिश जारी थी। अचानक भागो-भागो की आवाज आई, बाहर देखा तो लोग
बदहवासी से भाग रहे थे। मैं भी बेटे मनीष और भतीजे राहुल का हाथ पकड़कर
पहाड़ी की ओर भागा। पीछे सब कुछ तबाह हो रहा था।
मनीष अचेत हो गया
मौत
पीछे थी और खुद के बचने की उम्मीद कम, बच्चों का मोह छुटाए नही छूटता।
मैने एक को पीठ और दूसरे को गोद में रखकर तेजी से कदम बढ़ाने शुरू किए। रात
के घुप अंधेरे में रास्ते का भान नही हुआ। फिर अचानक गोद में रखा मनीष
अचेत हो गया, ठंड से उसका शरीर सफेद पड़ गया था, वो हमें छोड़कर जा चुका
था।
हौले से माथा चूमकर उसके निर्जीव हो चुके शरीर को पेड़ के सहारे
लिटा कर मैं राहुल के साथ भाग खड़ा हुआ। दिल बहुत रोया पर भतीजे को बचाने
के लिए चलता रहा।
घटना के पांच दिन बाद वो गांव पहुंचे। पत्नी के
बेटे के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि जिगर नहीं परिवार का टुकड़ा
बचाकर आया हूं।
दुख अब शायद ही जेहन से निकल पाएगा
हादसे
में गांव के 15 वर्षीय प्रदीप पुत्र रणवीर सिंह, 16 वर्षीय पवन पुत्र
विक्रम सिंह, 16 वर्षीय प्रदीप पुत्र सुदर्शन सिंह भी छोटी उम्र में ही काल
का ग्रास बन चुके हैं। गांव के 33 वर्षीय मुकेश सिंह पुत्र प्रताप सिंह,
58 वर्षीय नारायण सिंह पुत्र मदन सिंह, 60 वर्षीय अवतार सिंह पुत्र बचन
सिंह की भी हादसे में मौत हो चुकी है। जिगर के इन टुकड़ों को गंवाने का दुख
दर्द अब शायद ही ग्रामीणों के जेहन से निकल पाएगा।
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