इन दिनों गंगा की तेज धारा में बहकर आ रही लकड़ी की डाटों को पकड़ने के लिए लोग जोखिम उठा रहे हैं। सरेआम गंगा के बहाव में घुस रहे लोगों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस, प्रशासन और वन विभाग कोई प्रयास नहीं कर रहा है।
जिससे अचानक जलस्तर बढ़ने पर कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है। पर्वतीय इलाकों में लगातार जारी बरसात से गंगा का जलस्तर बढ़ने से प्रशासन द्वारा गंगा की तेज धारा में प्रवेश पर रोक लगाई हुई है।
पुलिस के जवानों को तैनात किया गया
इसके लिए गंगा घाटों पर कुछ स्थानों पर पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है, मगर इसका कहीं कोई असर नहीं दिख रहा। इस तरह का नजारा मायाकुंड क्षेत्र में रोजाना देखने को मिलता है। लोग गंगा तटों पर जमे हुए हैं और तेज बहाव में घुसकर बहकर आ रही लकड़ी की डाटें पकड़ने के लिए जोखिम उठा रहे हैं।
ऐसे में यहां तैनात पुलिसकर्मी किस तरह से ड्यूटी निभा रहे हैं यह समझ से परे है। पूर्व सभासद रामकृपाल गौतम ने बताया कि इस मामले में वन विभाग और पुलिस प्रशासन लापरवाह बना हुआ है।
ऐसा करने से रोकते नहीं पुलिसकर्मी
लोग लकड़ी की डाटों को पकड़कर डंप कर रहे हैं। बताया कि पुलिसकर्मी ड्यूटी पर आते जरूर हैं, मगर वह जोखिम उठाकर गंगा में घुस रहे लोगों को ऐसा करने से रोकते नहीं हैं।
उधर, उपजिलाधिकारी हिमालय सिंह मर्तोलिया का कहना है कि इस बाबत पुलिस और वन विभाग को निर्देश दिए गए हैं। यदि फिर भी लोग जोखिम उठाने से बाज नहीं आ रहे तो संबंधित लोगों के साथ ही विभागों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।