प्री-मानसून की अतिवृष्टि से पिलंगगाड परियोजना तहस-नहस हो गई। हालत यह हैं कि अब उत्तराखंड जल विद्युत निगम को इस कमाऊ परियोजना को नए सिरे से डिजायन करके दोबारा से बनाने के लिए लंगी जद्दोजहद करनी पड़ेगी।
भागीरथी की गाद से मनेरी भाली की दोनों परियोजनाओं में उत्पादन लायक स्थिति नहीं बन पा रही है। 90 मेगावाट की स्टेज वन की टेलरेस चैनल के तीनों गेट इस कदर गाद से अटे पड़े हैं कि इसको ठीक कर उत्पादन शुरू करने के बारे में अधिकारी कुछ नहीं बता पा रहे हैं।
304 मेगावाट की मनेरी भाली स्टेज टू के जलाशय में इतनी गाद पहुंच रही है कि 13 दिन बाद भी उत्पादन लायक स्थिति नहीं बन पाई है। अतिवृष्टि से 2250 किलोवाट की पिलंगगाड लघु जल विद्युत परियोजना इस कदर बर्बाद हो गई कि उसे चालू होने में लंबा समय लग सकता है।
उत्पादन ठप्प
परियोजना का हेड, डिसिल्टिंग चैंबर, 200 मीटर पावर चैनल तथा टेलरेस का निर्माण पूरी तरह नदी की धारा में ही बह गया है। ग्रिड से जुड़ी इस परियोजना के नुकसान को देखते हुए जल विद्युत निगम के अधिकारी इसे नए सिरे से डिजाइन करने के लिए विशेषज्ञ इंजीनियरों की तलाश में हैं। फिलहाल ऐसी स्थितियों में आने वाले लंबे समय तक भी परियोजना से उत्पादन की उम्मीद नहीं लगाई जा सकती।
'मनेरी भाली फेज वन की टीआरसी में जमा रेत हटाने का काम चल रहा है। पिलंग गाड परियोजना इस कदर बर्बाद है कि इसे नए सिरे से डिजाइन करने की स्थिति पैदा हो गई है। निगम विशेषज्ञों की टीम बनाकर इसका ऐसा डिजाइन तैयार करेगा जिसमें अतिवृष्टि से नुकसान की संभावनाएं कम हों।'
केके जायसवाल, ईई जल विद्युत निगम।