‘तेरे वादे पर जिये हम तो जान झूठ जाना-खुशी से मर न जाते गर एतबार होता।’ केदारघाटी में गालिब का यह शेर आंध्रप्रदेश के तीर्थयात्री विश्वनाथ (57) की जिंदगी की तरजुमानी हो गया।
गौरीकुंड में फंसे इस यात्री को जब तक सकुशल घर पहुंचने की दिलासा दी जाती रही तो उम्मीद में वह जिंदा रहा।
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जब वाकई में घर जाने की बारी आई तो हेलीकाप्टर में चढ़ते वक्त खुशी के मारे उसे हार्ट अटैक पड़ गया और मौत हो गई। गौरीकुंड में आईएमए के प्रांतीय सचिव सीनियर फिजिशियन डा. डीडी चौधरी उसका इलाज कर रहे थे। उन्होंने बताया कि मुसीबत में तो विश्वनाथ अपने को संभाले रहा।
उम्मीद छोड़ दी
जब हेलीकाप्टर में उसे लगभग चढ़ा दिया गया तो बहुत खुश हुआ और कार्डिएक अरेस्ट हो गया। उसकी मिट्टी वहीं रह गई। डा. चौधरी ने बताया कि घाटी में फंसे यात्री बहुत घबराए हैं। कई ने तो यह उम्मीद छोड़ दी है कि जिंदा घर पहुंच पाएंगे। तबाही के बाद हालात बदतरीन हो गए हैं।
खुश हुए तो बेहोश हो गए
तीन यात्री और हैं जो बहुत खुश हुए तो बेहोश हो गए। इंदौर मध्यप्रदेश के रहने वाले राजेश कुमार, झारखंड के विनोद और अनुपम गुप्ता आए तो थे अलग-अलग लेकिन मुसीबत के वक्त में दोस्त हो गए। कई दिनों से भूखे और परेशान थे। जब हेलीकाप्टर देखा तो चढ़ने के लिए दौड़ पड़े और गश खाकर गिर गए।
हेलीकॉप्टर उड़ गया और वे वहीं पड़े रहे। बाद में डाक्टरों ने उनका इलाज किया और होश में लाए। डाक्टरों का कहना है कि गौरीकुंड लाशों से पटा पड़ा है। अब भी वहां यात्रियों के लिए ढंग से राहत नहीं पहुंच पा रही है।