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SC का आदेश मान रहे हैं रावत, CBI के सामने पेश नहीं होंगे: इंदिरा हृदयेश

Mon, 09 May 2016 08:51 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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Indira Hridayesh - फोटो : ani
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सोमवार को उत्तराखंड के निवर्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत को दिल्ली में ‌सीबीआई के समक्ष पेश होना है, लेकिन इंदिरा हृदयेश का कहना है कि वह आज सीबीआई के सामने पेश नहीं होंगे।
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कांग्रेस की वरिष्ठ नेता इंदिरा हृदयेश ने कहा है कि हरीश रावत सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए 10 मई को फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित करेंगे। इस कारण वह सोमवार 9 मई को सीबीआई के सामने पेश नहीं होंगे।

उन्होंने कहा कि हरीश रावत मंगलवार को विधानसभा में होने वाले फ्लोर टेस्ट की प्रक्रिया के बारे में विधायकों संग चर्चा करेंगे। वह आज दिल्ली जाने की स्थिति में नहीं हैं।
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इससे पहले र‌विवार को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने यह तो स्वीकार कर लिया कि सीबीआई का समन उन्हें मिल गया है। लेकिन सोमवार को वह सीबीआई के सामने पेश होंगे या नहीं यह स्पष्ट नहीं किया।

रावत ने फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले समन दिए जाने पर हैरानी भी जताई, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि वे सीबीआई के सामने पेश होने के लिए सोमवार को दिल्ली जाएंगे या नहीं। रविवार को कांग्रेस भवन में मीडिया से मुखातिब रावत ने कहा कि सीबीआई का समन मिलने के बाद उनका कार्यक्रम यथावत है।

सीबीआई ने बुलाया है तो जाना ही होगा। कहा कि यह हैरान करने वाली बात है कि दस मई को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रदेश में फ्लोर टेस्ट होना है और उससे कुछ समय पहले ही सीबीआई उन्हें समन भेज रही है। फिर भी वे अपने साथियों के साथ इस मामले में विचार कर रहे हैं।

नया स्टिंग बढ़ाएगा कांग्रेस की दिक्कतें

सीबीआई - फोटो : DEMO Pics
एक और स्टिंग सामने आने से कांग्रेस की मुसीबतें बढ़ सकती हैं। हार्स ट्रेडिंग प्रकरण की छानबीन में जुटी सीबीआई अब जांच का दायरा और बढ़ा सकती है। ताजा स्टिंग की सत्यता फिलहाल जांची नहीं गई है, लेकिन सीबीआई इसे जांच में शामिल कर सकती है।

ऐसा हुआ तो कांग्रेस के लिए परेशानी बढ़ सकती है। एक तो सीबीआई के मुकदमा दर्ज करने की तलवार लटकी रहेगी, दूसरा आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा स्टिंग कांड को भुनाने का कोई मौका नहीं छोड़ेगी।

प्रदेश में चल रहे सियासी घमासान के बीच फ्लोर टेस्ट की पहली तय तिथि 28 मार्च से ठीक दो दिन पहले पूर्व सीएम हरीश रावत का स्टिंग सामने आया था। इसके बाद प्रदेश की सियासत और गरमा गई। यहां तक कि केंद्र ने राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए स्टिंग को आधार बनाया था।

एक बार फिर 10 मई को फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले एक और स्टिंग सामने आया है। ताजा स्टिंग इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि पहले स्टिंग पर सीबीआई प्राथमिक जांच (पीई) दर्ज कर जांच शुरू कर चुकी है। पूर्व सीएम को पूछताछ के लिए सीबीआई ने समन तक भेज हुआ है। उधर, नए स्टिंग में जिस तरह से कई विधायकों के नाम का खुलासा किया गया है, वह मामले को गंभीर बना रहा है।
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स्टिंग में खुलासा, सिंघवी ने पार्टी से भी गिनवाई फीस

वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु‌ सिंघवी ने हरीश रावत की तरफ से पैरवी की। - फोटो : AmarUjala
न्यूज चैनल के स्टिंग को सही माने तो इसमें कई दिलचस्प खुलासे हुए हैं। इसमें सबसे अहम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी का पेशेवर अंदाज है। सिंघवी ने अपनी ही पार्टी की सरकार का मुकदमा लड़ने में मोटी फीस वसूली है।

विधायक मदन बिष्ट बागी विधायक हरक सिंह रावत से बातचीत में भगवान की कसम खाते हुए सिंघवी की ओर से मोटी फीस लिए जाने का दावा करते दिख रहे हैं। गौरतलब है कि सिंघवी ने नैनीताल हाईकोर्ट के अलावा सुप्रीम कोर्ट में भी रावत की ओर से मुकदमे की पैरवी की थी।

स्टिंग में बिष्ट हरक सिंह से पूर्व सीएम रावत द्वारा अधिक पैसा नहीं बनाने की बात करते हैं। वह कहते हैं कि खनन मामले में उनकी कमाई 27 करोड़ से ज्यादा नहीं होगी।

इसी दौरान वह यह भी कहते हैं कि मैंने पूर्व सीएम से पैसे के प्रबंध की बात कही तो वह कह रहे हैं कि वकीलों पर रोज 35-40 लाख रुपये का खर्च बैठ रहा है। हरक सिंह सिंघवी की ओर से फीस लिए जाने पर संदेह जाहिर करते हैं। इस पर बिष्ट कहते हैं बाईगॉड ले रहे हैं।
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