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अभी हरीश रावत के सामने है एक और इम्तिहान

Thu, 12 May 2016 03:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून

सार

  • मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए दर्जन भर विधायक हैं लाइन में
  • किसी भी समय हो सकता है मंत्रिमंडल का विस्तार
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हरीश रावत - फोटो : ANI
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विस्तार
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हरीश रावत के लिए अभी एक और इम्तहान इंतजार कर रहा है। कुर्सी संभालने के बाद हरीश रावत के लिए सबसे कठिन काम मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। कैबिनेट की दो बर्थ रिक्त हैं और दावेदार कई हैं। यह चुनावी वर्ष भी है, इसलिए क्षेत्रीय और सामाजिक के साथ ही हरीश को राजनीतिक संतुलन बनाने की क्षमता का परिचय भी देना होगा। मौजूदा हालात में हरीश रावत कैबिनेट में किसी बड़े फेरबदल से परहेज करेंगे, केवल दो रिक्त पदों को ही भरा जाएगा।
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मंत्री पद पर कई दावेदार
देहरादून से ही डोईवाला विधायक हीरा सिंह बिष्ट और विकासनगर विधायक नवप्रभात प्रबल दावेदार हैं। नवप्रभात गर्दिश के दौर में साथ खड़े रहे, बिष्ट की वरिष्ठता भी कम नहीं है। हरिद्वार में सर्वाधिक नौ विधानसभा सीटें हैं, लेकिन कुंवर प्रणव चैंपियन व प्रदीप बत्रा की सदस्यता जाने के बाद जिले की भगवानपुर सीट से ममता राकेश और पिरान कलियर से फुरकान अहमद दो ही बचे हैं। जबकि दो बसपा के विधायक भी मंत्रीपद के दावेदार हैं। हरिद्वार को यदि मंत्री नहीं मिला तो इसका असर विस चुनाव में देखने को मिल सकता है।
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महाराज के समर्थक भी किए रहे किनारा

सतपाल महाराज - फोटो : AmarUjala
उधर, चमोली से तीनों विधायक कांग्रेस के हैं और तीनों को ही महाराज समर्थक माना जाता है। राजेंद्र भंडारी, प्रोफेसर जीतराम व अनुसुइया प्रसाद मैखुरी तीनों ही इस जटिल दौर में अपने गुरु सतपाल महाराज से किनारा कर हरीश के साथ रहे। श्रीनगर से गणेश गोदियाल की स्थिति भी यही रही।

अल्मोड़ा से मनोज तिवारी, चंपावत से हेमेश खर्कवाल, पिथौरागढ़ से मयूख महर भी मंत्री पद के दावेदार हैं। महर तो तीन बार के एमएलए हैं और मंत्री नहीं बनाने से नाराज होकर उन्होंने योजना आयोग के उपाध्यक्ष का पद आज तक नहीं संभाला। ऐसे में हरीश रावत को इस राजनीतिक संतुलन की कसौटी पर खरा उतरना होगा।
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