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गुरुकुलीय परंपरा की ही देन हैं हम : बालकृष्ण

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गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस पर हवन यज्ञ करते हुए। - फोटो : HARIDWAR
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गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय का 120वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि हम जो कुछ भी हैं ऋषि दयानंद और गुरुकुलीय परंपरा की ही देन हैं। हमें भारतीय ज्ञान परंपरा से बोध और स्वाभिमान से भरा होना चाहिए। संस्कृति की जड़ों पर आक्रमण होने पर जागरूक और सजग होना होगा।
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अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ. ओम प्रकाश पांडेय ने कहा कि उपनिवेशवाद के कारण भारत पर एक आयतित भाषा और ज्ञान का बौद्धिक आक्रमण हुआ है। हमें उपनिवेशवादी मानसिकता छोड़नी चाहिए। भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे लाना होगा, यह सच्ची स्वाधीनता होगी। भारत सभ्यता केंद्र के निदेशक रविशंकर ने कहा कि विदेशी बौद्धिक आक्रमण से लड़ने का सामर्थ्य ऋषि दयानंद ने प्रदान किया है। भारत ज्ञान परंपरा को ऋषि दयानंद और स्वामी श्रद्धानन्द ने आगे बढ़ाया है।
जेएनयू के डीन संस्कृत प्रो. सुधीर आर्य ने कहा कि वैदिक संस्कृति के लिए गुरुकुल कांगड़ी विवि ने महत्वपूर्ण कार्य किया है। महर्षि दयानंद की प्रगतिशील परंपरा को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा वैदिक शिक्षा दर्शन मानवीय मूल्यों का संवाहक रहा है। प्रो. भारत भूषण विद्यालंकार, कुलपति प्रो. रूप किशोर शास्त्री ने कहा कि गुरुकुल भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं उन्नयन के लिए प्रतिबद्ध है। वित्ताधिकारी प्रो. वीके सिंह ने अतिथियों का आभार जताया। संचालन कुलसचिव डा. सुनील कुमार ने किया। इस दौरान प्रो. राकेश शर्मा, प्रो. आरसी दुबे, प्रो. सोमदेव शतांशु, प्रो. सत्यदेव निगमालंकार, प्रो. नवनीत, प्रो. एलपी पुरोहित, प्रो. सुरेंद्र त्यागी, डॉ. अजय मलिक, डॉ. शिवकुमार चौहान, प्रो. श्यामलता जुयाल, प्रो. सुचित्रा मलिक, प्रो. नमिता जोशी, डॉ. पंकज कौशिक, कुलभूषण शर्मा, हेमंत सिंह नेगी, रूपलाल, डॉ. विपुल भट्ट आदि मौजूद रहे।
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