हरिद्वार। पहले शहर के चंडी घाट पर कथित ब्रह्मकुंड और अब मायापुर में शिव की पैड़ी की घोषणा, इससे विवाद गहरे होते जा रहे हैं। पौराणिक मान्यता है कि करीब नौ लाख वर्ष पूर्व त्रेता युग में जब श्रीराम के पुरखे राजा भगीरथ गंगा लेकर हरिद्वार पहुंचे थे, तब भी ब्रह्मा के नाम के बना ब्रह्मकुंड यहां विद्यमान था। राजा विक्रमादित्य के बड़े भाई राजा भतृहरि के नाम पर करीब 21 सौ वर्ष पूर्व भतृहरि की पैड़ी बनी। कालांतर में इसी का नाम हरकी पैड़ी पड़ गया। संतों का कहना है कि पैड़ी के नाम से कोई दूसरी पैड़ी हरिद्वार में नहीं बनाई जा सकती। ब्रह्मकुंड भी वही रहेगा, जो ब्रह्मा के नाम से हरकी पैड़ी पर मौजूद है।
मान्यता के अनुसार हरकी पैड़ी और ब्रह्मकुंभ गंगा के आने के बाद एक ही जगह विलीन हो गए। त्रेता युग में जब गंगा जी आईं थी, जब चंडी पर्वत से लेकर मंसा पर्वत तक केवल गंगा ही गंगा थी। न कोई द्वीप, न कोई रास्ता। ब्रह्मकुंड भी दोनों पहाड़ों के बीच फैला हुआ था। करीब 21 सौ वर्ष ब्रह्मकुंड के सामने वाली पहाड़ी पर एक गुफा बनाकर उज्जैन के राजा भतृहरि ने तपस्या की थी। उन्होंने ब्रह्मकुंड तक पहाड़ काट कर गंगा स्नान के लिए आने को सीढ़ियां बनाई थी। इस सीढ़ियों को दशकों तक भतृहरि की पैड़ी कहा जाता रहा। बाद में जिन विक्रमादित्य के नाम से विक्रमी संवत बना है, उन्होंने इन पैड़ियों को हर का नाम देते हुए हरकी पैड़ी कहा। तब से हरकी पैड़ी प्रसिद्ध हो गई।
........................
नाम सुनते ही किया बहिष्कार
हरिद्वार। हमें गंगा चैनल के उद्घाटन के लिए बुलाया गया था। जब वहां शिव पैड़ी नामकरण की घोषणा हुई तो गंगा सभा के प्रतिनिधिमंडल ने कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया। हरकी पैड़ी और ब्रह्मकुंड से यात्रियों को शिव पैड़ी पर लाने तक की बात समारोह में कही जा रही थी। गंगा सभा यह कतई बर्दाश्त नहीं करेगी कि हरकी पैड़ी का वजूद घटाया जाए। हरिद्वार में केवल हरकी पैड़ी ही चलेगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से भी शिकायत की जाएगी।
- गांधीवादी पुरुषोत्तम शर्मा, अध्यक्ष गंगा सभा
......................
संत समाज करेगा कड़ा विरोध
हरिद्वार का संत जगत यह कदापि स्वीकार नहीं करेगा कि हरकी पैड़ी का महत्व घटाया जाए। ऐसा लग रहा है कि शिव की पैड़ी बनाकर हरिद्वार के धर्म क्षेत्र से यात्रियों को दूर भगाने का षड्यंत्र किया गया है। शिव के नाम से भ्रम पैदा होगा और नए प्रस्तावित घाट को हरकी पैड़ी का रूप दिया जाएगा। इसका असर हरिद्वार के व्यवसाय पर पड़ेगा। संत जगत ऐसा नहीं होने देना। इस संबंध में मुख्यमंत्री को भी हरिद्वार की आवाज से अवगत करा दिया गया है।
- ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, जयरामपीठाधीश्वर