धरती पर भगवान शिव का साम्राज्य गुरुवार की रात समाप्त हो जाएगा। सवेरे भगवान विष्णु सहित अनेक देवता जग जाएंगे। धरती पर अब विष्णु का साम्राज्य चलेगा। देवोत्थान एकादशी का पर्व घर घर मनाया जाएगा। कार्तिक पूर्णिमा का पवित्र स्नान 14 नवंबर को आयोजित होगा।
आषाढ़ शुक्ल एकादशी के दिन शिव जागरण हुआ था और विष्णु परंपराओं के अनुसार राजा बलि के दरबार में शयन पर चले गए थे। हरिप्रमोदनी एकादशी कार्तिक में पड़ती है। यह पर्व गुरुवार को पूर्वान्ह 11:21 बजे प्रारंभ हो गया। उदयकाल में एकादशी शुक्रवार को है। इसी दिन देवताओं का जागरण होगा। विष्णु के जगते ही तुलसी विवाह का आयोजन किया जाएगा। यह पर्व समूचे भारत में श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। पंचपुरी के घरों में चावल के ऐपन से देवताओं की आकृतियां सजाई जाएंगी। घर के आंगन में कांसे का थाल गन्ने अथवा मूली से बजाकर देवों को जगाने की परंपरा का निर्वहन होगा। इसी दिन से विवाह सीजन प्रारंभ हो जाएगा, जो दिसंबर में कुछ समय के विराम के उपरांत जनवरी में पुन: शुरू होगा। एकादशी तिथि गुरुवार को लग जाने से आज भी कई विवाह हुए।
बहुत से संत दो महीने का चार्तुमास मनाते हैं। उन संतों का चार्तुमास भादों में समाप्त हो चुका है। जो संत प्राचीन मर्यादा के अनुरूप पूरे चार महीने का चार्तुमास मनाते हैं, उनका चार्तुमास भी एकादशी के दिन संपन्न होगा। विशेषकर जैन समाज के संत इस दिन यात्राएं प्रारंभ करेंगे। विष्णु के जगते ही अनेक स्थानों पर भागवत कथाएं प्रारंभ हो जाएंगी। कुछ कथाएं पहले ही प्रारंभ हो चुकी हैं। कार्तिक पूर्णिमा का स्नान 14 नवंबर को होगा और उसी दिन देव दीपावली मनाई जाएगी।
- जीवन का शाश्वत सत्य है मृत्यु
महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद ने कहा कि भागवत कथा जीने की राह दिखाती है। यह बताती है कि जीवन का शाश्वत सत्य मृत्यु है। उदासीन आश्रम संगलवाला में भागवत कथा सुनाते हुए हरिचेतनानंद ने कहा कि भागवत कथा सुनने वालों के घरों में पाप मिटने लगते हैं। सुखों का आगमन होता है। यह कथा कलयुग में वैतरणी के समान है।