अलग प्रदेश बनने के 16 साल बाद उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने जनपद हरिद्वार की 28 नहरें उत्तराखंड सिंचाई विभाग को हस्तांतरित कर दी हैं। बृहस्पतिवार को भीमगोडा बैराज स्थित अलकनंदा गेस्ट हाउस में दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच कई घंटों की बैठक के बाद उत्तर प्रदेश ने उत्तराखंड की नहरों का कब्जा छोड़ा, लेकिन नहरों के साथ लगी खाली भूमि, आवासीय भवन एवं निरीक्षण भवनों के हस्तांतरण समझौते के बाद भी नहीं हो सका है। इसके लिए यूपी के अधिकारियों ने भूमि व भवन के हस्तांतरण करने का शासनादेश नहीं होना बताया है।
उत्तराखंड सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता दिनेश चंद्रा, अधीक्षण अभियंता मोहन चंद्र पांडेय, गंगा संचालन मंडल मेरठ के अधीक्षण अभियंता जियाउल हसन की उपस्थिति में सिंचाई खंड हरिद्वार व रुड़की एवं उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग मुजफ्फरनगर, रुड़की व नजीबाबाद बिजनौर के अधिशासी अभियंताओं, उप राजस्व उप राजस्व अधिकारियों व जिलेदारों ने 28 नहरों के हस्तांतरण प्रपत्रों पर हस्ताक्षर किए। अधीक्षण अभियंता मोहन चंद्र पांडेय ने बताया कि जो 28 नहरें उत्तराखंड को मिली हैं उनमें मुजफ्फनगर से 11 नहरें उत्तराखंड सिंचाई विभाग के रुड़की खंड के अधिशासी अभियंता विकास श्रीवास्तव और 17 नहरें सिंचाई खंड हरिद्वार के अधिशासी अभियंता डीके सिंह को हस्तांतरित की गई हैं।
यूपी की ओर से उत्तरी खंड गंगनहर के अधिशासी अभियंता चंद्रभान यादव, मुजफ्फरनगर के अधिशासी अभियंता हृदय नारायण सिंह, नजीबाबाद के अधिशासी अभियंता एनके कंसल व गंगा कैनाल हैडवर्क्स के सहायक अभियंता सुशील यादव आदि अधिकारी ने हस्तांतरण पत्रों पर हस्ताक्षर किए हैं। अधीक्षण अभियंता मोहन चंद्र पांडेय ने बताया कि 26 दिसंबर के समझौते के अनुसार नहरों के अलावा भूमि और भवनों का भी हस्तांतरण किया जाना था, लेकिन उत्तर प्रदेश के अधिकारियों का कहना था कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अभी केवल नहरों का हस्तांतरण उत्तराखंड को करने का शासनादेश ही जारी किया है। अन्य परिसंपत्तियों का हस्तांतरण नया शासनादेश जारी होने के बाद ही किया जाएगा।