होटल धर्मशाला समिति के पदाधिकारियों के साथ बैठक लेते हुए शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक।
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शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक के हस्तक्षेप के चलते धर्मशाला प्रबंधकों को बड़ी राहत मिली है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की ओर से धर्मशालाओं में सीवर का कनेक्शन लेने अथवा एसटीपी प्लांट नहीं लगाए जाने पर सीलिंग की कार्रवाई पर फिलहाल ब्रेक लग गया है।
सोमवार को राष्ट्रीय धर्मशाला सुरक्षा समिति और क्षेत्रीय धर्मशाला प्रबंध समिति की ओर से निष्काम सेवा ट्रस्ट भूपतवाला में धर्मशाला प्रबंधकों की उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। इसमें शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक भी शामिल हुए। इस दौरान धर्मशालाओं और आश्रमों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से भेजे जा रहे नोटिसों को लेकर प्रबंधकों ने विरोध जताया। क्षेत्रीय धर्मशाला प्रबंधक समिति के अध्यक्ष गोपाल सिंघल और राष्ट्रीय धर्मशाला सुरक्षा समिति के अध्यक्ष महेश गौड़ ने कहा कि हरिद्वार की धर्मशालाएं और आश्रम उत्तर प्रदेश के समय से ही कर मुक्त रहे हैं। उत्तराखंड सरकार ने भी आश्रम और धर्मशालाओं को न्यूनतम करारोपण की स्थिति में रखा हुआ है, लेकिन उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रुड़की द्वारा तीन महीने से धर्मशालाओं और आश्रमों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने धर्मशाला और आश्रम प्रबंधकों तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों का पक्ष सुना और उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष आनंद वर्धन से फोन पर वार्ता की। इस दौरान तय हुआ कि फिलहाल प्रदूषण विभाग द्वारा इस प्रक्रिया को रोका जाए और अगले तीन दिनों में धर्मशाला समिति का एक प्रतिनिधिमंडल देहरादून जाकर बोर्ड के अध्यक्ष आनंदवर्धन से मिलेगा और उन्हें धर्मशालाओं तथा आश्रमों के बारे में जानकारी देगा।
इस मौके पर श्याम सुंदर शर्मा, अवधेश कुमार, रामअवतार शर्मा, लक्ष्मी दत्त चिलकोटी, चंद्र प्रकाश शर्मा, रमेश भाई ठाकर, श्रीनिवास पांडे, गौरव भारद्वाज, प्रभात कौशिक, स्वामी सत्यानंद गिरी, महेंद्र शर्मा, अमित शर्मा, हेम नारायण, दिनेश शर्मा, प्रदीप शर्मा, पार्षद प्रतिनिधि विदित शर्मा, विनीत जौली व अनिरुद्ध भाटी आदि उपस्थित रहे।