हरिद्वार में गंगा स्नान के लिए उमड़ी भीड़
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सूर्य के ग्रहण के बाद देशभर से आए करीब दो लाख श्रद्धालुओं ने कड़कड़ाती ठंड में हरकी पैड़ी पर गंगा स्नान किया। ग्रहण के समय श्रद्धालु गंगा घाटों पर जप तप करते रहे। पितृ श्राद्ध करने वालों की भी भीड़ लगी रही।
ग्रहण का काल लगने से पूर्व ही हरिद्वार नगर के तमाम बाजार बंद हो गए थे। खाने-पीने की दुकानों और होटलों में बनाए गए भोजन को तुलसी दल अथवा कुशा रखकर शुद्ध रखा गया। मान्यताओं के अनुसार पके भोजन में ग्रहण के समय अशुद्धियां रोकने के लिए सदा ही ऐसा किया जाता रहा है। ग्रहण के समय श्रद्धालु गंगा घाटों पर बैठे रहे और गीता आदि धर्म ग्रंथों से पाठ कर सूर्य के शीघ्र ही ग्रहण के दोष से मुक्त होने की कामना की गई।
ग्रहण के समय और उसके बाद लोगों ने ग्रहण का दान किया। सूर्य ग्रहण खत्म होने के बाद गंगा स्नान शुरू हुआ। बृहस्पतिवार की सुबह भी कोहरा छाए रहने के कारण सूर्य देव के दर्शन नहीं हो सके। कड़ाके की ठंड के बाद भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने कुशावर्त और नारायणी शिला जाकर पितृकर्म सम्पन्न कराए।
ग्रहण समाप्ति पर धर्म नगरी के सभी मंदिरों में धुलाई की गई। मूर्ति विग्रहों के वस्त्र उतारकर स्नान कराया गया और नए वस्त्र पहनाए गए। मंदिरों में देव प्रतिमाओं की आरती उतारी गई। रातभर बंद रहे मंदिरों के खुलने पर स्नानार्थियों ने भी दर्शन किए। देव प्रतिमाओं को खाद्य पदार्थों का भोग लगाया गया। हर की पैडी सवेरे होने वाला रुद्राभिषेक और गंगा आरती दोपहर 12 बजे ई। मां गंगा को भी भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया गया।