गंगा की रक्षा के लिए एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेशों का पालन नहीं किए जाने पर प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को हाईकोर्ट में तलब किए जाने पर अब स्थानीय प्रशासन हरकत में आ गया है। जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन ने बुधवार की देर शाम अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में एनजीटी के मानक पूरे नहीं करने पर दो आश्रम व तीन धर्मशालाओं को नोटिस देकर उन्हें बंद करने के निर्देश दिए।
रोशनाबाद स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में हुई बैठक में जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन ने एनजीटी के आदेशों का अनुपालन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी फैक्ट्रियों, होटलों, प्रतिष्ठानों, आश्रमों और धर्मशालाओं के सीवर कनेक्शन की जांच करने और सभी जगह वैध कनेक्शन जुड़वाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सीधे गंगा में सीवर डालने वाले प्रतिष्ठानों को तीन दिन का नोटिस देने के बाद उन्हें बंद कर दिया जाए। जहां सीवर लाइन नहीं हैं वहां एसटीपी लगवाने, पॉलिथीन का प्रयोग करते पाए जाने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाने के निर्देश दिए। बैठक में प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अधिकारियों ने रिपोर्ट प्रस्तुत कर बताया कि भूपतवाला स्थित सतगुरु रैन बसेरा, निराला धाम, दूधाधारी चौक स्थित सूर्य कवि पंडित लक्ष्मीचंद धर्मार्थ आश्रम, रघुनाथ भवन और श्री साईं भक्ति निवास सीवर के कनेक्शन नहीं लिए हैं। डीएम ने इन सभी को नोटिस देकर तीन दिन का समय दिया जाए। डीएम ने कहा कि यदि तीन दिन के भीतर जरूरी कदम नहीं उठाते हैं तो सील कर दिया जाए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डॉ मेहरबान सिंह बिष्ट, अपर जिलाधिकारी, डॉ अभिषेक त्रिपाठी, अपर जिलाधिकारी डॉ ललित नारायण मिश्र, संयुक्त मजिस्ट्रेट मयूर दीक्षित, नगर मजिस्ट्रेट जय भारत सिंह, एमएनए अशोक कुमार सहित संबंधित अघिकारियों के खिलाफ निर्देश दिए।