हरिद्वार। कोषागार और बैंकों के कर्मचारियों की हड़ताल के कारण शुक्रवार को दिनभर लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हड़ताली कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर धरना- प्रदर्शन किया। कोषागार कर्मचारियों की हड़ताल लंबी खिंचती है तो इससे कई विभागों के कर्मचारियों का वेतन रुकने, स्टांपों की बिक्री और अर्द्घकुंभ के कामों पर भी ब्रेक लग सकता है। कोषागार के कर्मचारियों ने हड़ताल जारी रखने का दावा किया है जबकि बैंकों की हड़ताल केवल एक दिन की थी।
लेखाकारों और सहायक लेखाकारों के ग्रेड वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर कोषागार कर्मचारी संगठन से जुड़े कर्मचारी शुक्रवार को हड़ताल पर रहे। कर्मचारियों ने रोशनाबाद स्थित सदर कोषागार में धरना दिया। कोषागार कर्मचारी संगठन के जिलाध्यक्ष एसके गुप्ता ने धरना स्थल पर कहा कि उनकी प्रमुख मांगों सहायक लेखाकारों का ग्रेड वेतन 2800 से 4200 करने व लेखाकारों का ग्रेड वेतन 4600 से 4800 करना है। उन्होंने कहा कि सहायक लेखाकार और लेखाकार बराबर काम करते हैं लेकिन सहायक लेखाकारों को अभी 2800 का ग्रेड वेतन दिया जा रहा है। इस मांग को लेकर पूर्व में शासन से वार्ता हो चुकी है, शासनादेश तैयार भी हो चुका है लेकिन जानबूझकर इसे लटकाया जा रहा है। संगठन के जिला मंत्री करमपाल सिंह ने कहा कि जब तक उनकी मांगे नहीं मानी जाती हड़ताल जारी रहेगी। हड़ताल के कारण लक्सर, रुड़की कोषागार कर्मियों ने भी कार्यबहिष्कार करते हुए धरने में शामिल हुए। वहीं कोषागार के सेवानिवृत्त कर्मियों ने भी धरनास्थल पर पहुंचकर अपना समर्थन दिया। धरनास्थल पर अशोक कुमार, प्रताप सिंह, शिवेंद्र कुमार, रामअवतार, अरविंद कुमार, योगेश गुप्ता, गुरुदत्त, विनय त्यागी, गंगा प्रसाद चंदोला, शोभाराम आदि थे। हड़ताल के कारण जिला प्रशासन और मेला प्रशासन के कई काम प्रभावित हुए। मुख्य रूप से शुक्रवार को लेनदेन का काम बंद रहा। स्टांपों की बिक्री नहीं हो सकी। सभी विभागों के बिलों के भुगतान की प्रक्रिया भी दिनभर नहीं हो सकी। अर्द्घकुंभ मेले से जुड़े भुगतान भी नहीं हो सका। कोषागार कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष एसके गुप्ता ने बताया कि अर्द्घकुंभ मेले से जुड़े निर्माण कार्यों के जितने बिल मिले थे उनका भुगतान तो बृहस्पतिवार की शाम तक ही कर दिया गया लेकिन अब जितने भी बिल हड़ताल की अवधि में आएंगे उनका भुगतान नहीं होगा। अन्य देयों पर भी संकट आ सकता है। स्टांप पेपर भी नहीं मिले। जिससे कई स्टाप वेंडरों को कोषागार से खाली हाथ वापस आना पड़ा। विभागीय लेेन का काम अटका रहा। राजकीय कार्यों के भुगतान का विवरण भी प्रभावित रहा।
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बैंक कर्मचारियों ने केंद्र के खिलाफ किया प्रदर्शन
हरिद्वार। एसोसिएट बैंकों के स्टेट बैंक में विलय के विरोध में आल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के आह्वान पर उत्तरांचल बैंक इंप्लाइज यूनियन से जुड़े कर्मचारियों ने देवपुरा चौक स्थित स्टेट बैंक ऑफ पटियाला के बाहर प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान बैंकों में कामकाज ठप रहा।
उत्तरांचल बैंक इंपलाइज यूनियन के जिलाध्यक्ष एनबी कपूर ने कहा कि केंद्र सरकार एसोसिएट बैंकों (स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर, स्टेट बैंक ऑफ जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ त्रावनकोर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला) का स्टेट बैंक का इंडिया में विलय करना चाहती है। जो कि कर्मचारियों के हित में नहीं है। उन्होंने कहा केंद्र सरकार की यह योजना कर्मचारियों को प्रताड़ित करने जैसा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यूनियन की ओर से दस वर्ष के संघर्ष के बाद द्विपक्षीय समझौता हुआ था जिसमें आश्रितों को नौकरी देने पर सहमति बनी थी। लेकिन सरकार की ओर से समझौता आदेश को मूर्त रूप नहीं दिया गया। एक दिवसीय हड़ताल में भारतीय स्टेट बैंक के कर्मचारियों को छोड़ सभी बैंकों के प्रतिनिधियों और कर्मचारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का संचालन यूनियन के जिला सचिव राजकुमार सक्सेना ने किया। इस अवसर पर राजीव गुप्ता, सतीश भट्ट, चंद्रमोहन रावत सहित कई बैंककर्मी उपस्थित रहे। बैंकों में हड़ताल के कारण दिनभर शहर भर के बैंकों का करोड़ों रुपये का लेनदेन बंद रहा। व्यापारी सामान का भुगतान थोक व्यापारियों और कंपनियों को करने के लिए ड्राफ्ट बनवाने के लिए घूमते रहे। कई कंपनियों के कर्मचारियों का वेतन सात जनवरी को ही आया था। शुक्रवार को वेतन लेने के लिए ऐसे कई कर्मचारी बैंकों के चक्कर काटते देखे गए। उत्तरांचल बैंक इंपलाइज यूनियन के जिलाध्यक्ष एनबी कपूर ने दावा किया कि इस हड़ताल के कारण जिले में करीब साढ़े छह सौ करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ।