कहने को तो हरिद्वार-नजीबाबाद हाईवे है लेकिन छह साल से पुल नहीं बन सका है। यातायात को नदी में बनाए गए रपटे से गुजारा जा रहा है। हालांकि, नए पुल का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन वह भी नहीं बनने से वाहन रपटे से गुजरने को मजबूर हैं।
हरिद्वार-नजीबाबाद हाईवे विश्वस्तरीय धर्मनगरी हरिद्वार को जोड़ता है। जिससे कांवड़ मेले से लेकर कुंभ, अर्द्धकुंभ और विभिन्न स्नान पर्वाें पर बड़ी संख्या में वाहन हाईवे से होकर आते हैं। लेकिन हाईवे पर उत्तर प्रदेश की कोटावाली नदी पर छह साल से पुल नहीं है। दरअसल, 2017 में पुल का पिलर खिसकने से वह क्षतिग्रस्त हो गया था। पुल के क्षतिग्रस्त होने से तब से ही वह बंद कर दिया गया था। हाईवे चौड़ीकरण में अब कोटावाली नदी पर पुल बनाने का कार्य चल रहा है, यह भी करीब दो साल से चल रहा है। लेकिन कछुआ गति से चल रहे पुल निर्माण का कार्य पूरा नहीं हो पा रहा है। जिसके कारण पुल के नीचे बने रपटे से बस से लेकर छोटे-बड़े वाहन गुजर रहे हैं। जिससे बरसात के सीजन में चालक जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं। इससे कभी भी बड़ी घटना हो सकती है।
ऐसा ही कुछ शनिवार को उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की यात्रियों से भरी के साथ होने से टल गया। अगर पुलिस की ओर से जरा भी लापरवाही की जाती तो यात्रियों के साथ कुछ भी हो सकता था, लेकिन पुलिस की ओर से तत्परता रहते हुए यात्रियों को जान बचाकर सराहनीय कार्य किया।
चालक की लापरवाही से जा सकती थी यात्रियों की जान
उत्तराखंड पुलिस की ओर से बरसात होने पर नदी के रपटे से एहतियात के तौर पर रूट को डायवर्ट कर दिया जाता है। जिसमें वाहन लाहड़पुर गंगनहर पटरी से नजीबाबाद भेजे जाते हैं, वाहन चालक नदी के बीच की यात्रा को असुरक्षित मानते हुए खुद भी गंगनहर से जाने को मुनासिब समझते हैं, लेकिन बस चालक की ओर से लापरवाही दिखाते हुए नदी में बस को घुसा दिया गया। वह भी तब जब नदी में पानी चल रहा था। इस लापरवाही से यात्रियों की जान जाते-जाते रह गई।