हरिद्वार। वन विभाग की आरक्षित जमीन पर कब्जा करने वालों को राजस्व परिषद उत्तराखंड कोर्ट से भी राहत नहीं मिल पाई है। परिषद की ओर से एसडीएम के फैसले को स्वीकार करते हुए आरोपितों की याचिका खारिज कर दी गई है।
हरिद्वार वन प्रभाग क्षेत्र में रसियाबड़ यूनिट की वन आरक्षित जमीन पर दूधला दयालवाला उर्फ टांटवाला के लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया था। आरोपितों की ओर से सालों से वन विभाग की जमीन पर अवैध रूप से खेतीबाड़ी की जा रही थी। लोगों की ओर से पक्के निर्माण भी किए गए हैं, जिसमें से पिछले महीने वन विभाग की ओर से एसडीएम कोर्ट के 2024 के आदेश पर 15 हेक्टेयर जमीन से अवैध कब्जे हटाकर दिए गए थे।
जमीन को वन विभाग की ओर से अपने कब्जे में ले लिया गया था, लेकिन आरोपियों की ओर से अब भी जमीन पर गिद्द दृष्टि बनी हुई है। वह जमीन पर फिर से कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। जमीन पर अवैध कब्जा करने के मामले में चार लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हो चुका है।
इन लोगों की ओर से एसडीएम कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए राजस्व परिषद उत्तराखंड न्यायालय में याचिका दायर की थी, मगर, परिषद कोर्ट की ओर से आरोपियों की याचिका को खारिज कर दिया गया है। कोर्ट के सदस्य सचिव उदय राज सिंह की ओर से अपने आदेशों में कहा गया है कि भूमि आरक्षित वन भूमि होने के कारण याचिकाकर्ताओं को कोई अधिकार प्रदान नहीं किए जा सकते हैं। इसलिए, वाद खारिज किया जाता है। कोर्ट की ओर से विश्लेषण और निष्कर्ष के बाद निगरानी निस्तारित की जाती है। राजस्व परिषद की ओर से उम्मीद टूटने से आरोपितों में हड़कंप मचा है।