हरिद्वार। प्रतिवर्ष नवरात्र नौ दिन चलते हैं। इस वर्ष 10 दिनों के नवरात्र पड़ रहे हैं। भगवती दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैल पुत्री की पूजा दो दिन की जाएगी। उससे पूर्व 16 दिनों के महालय श्राद्ध संपन्न हो जाएंगे।
धार्मिक दृष्टि से हिंदुओं में श्राद्ध पक्ष का बढ़ना अशुभ और नवरात्र का बढ़ना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा होने पर भगवती के पंडालों में एक दिन अधिक कथा आयोजित की जाती है। जहां शत चंडी और लक्ष चंडी यज्ञ हो रहे हों, वहां भी हवन का एक दिन बढ़ जाता है। यह भी समूचे विश्व के लिए बेहद शुभ माना गया है। जिस देवी का दिन बढ़ता है, नवरात्र में उस देवी का महत्व भी बढ़ जाता है। नवरात्र प्रारंभ होने के 10वें दिन श्रीराम का विजय पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह विजय पर्व 11वें दिन मनाया जाएगा। देवी भागवत के अनुसार भगवती के नवरात्रों में घरों में बैठकर उनका पाठ करने से सभी प्रकार के कष्ट नष्ट हो जाते हैं। भगवती मनुष्य के विघ्न हर लेती है।
16 दिनों का श्राद्ध पक्ष 16 सितंबर से प्रारंभ हो जाएगा। पितृ विसर्जन 30 सितंबर को किया जाएगा। 10 दिनों का नवरात्र पक्ष एक अक्तूबर को प्रारंभ होगा। नौ अक्तूबर को दुर्गा अष्टमी मनाई जाएगी। जो लोग अष्टमी को मानते हैं, वह इसी दिन यज्ञ कर देंगे। महानवमी और नवरात्र का समापन 10वें दिन 10 अक्तूबर को होगा। इसी दिन भगवती और सरस्वती की प्रतिमाओं का विसर्जन भी गंगा आदि पवित्र नदियों में किया जाएगा।
श्री रामचंद्र का विजय पर्व विजयदशमी 11 अक्तूबर को पड़ेगा। इस बार दशहरा और दीवाली दोनों पर्व अक्तूबर में संपन्न हो जाएंगे। महालक्ष्मी का पूजन 30 अक्तूबर को होगा। देवताओं के जागरण की तिथि हरिप्रबोधिनी एकादशी 11 नवंबर को पड़ रही है। उसी दिन से चार महीने से रुके विवाह प्रारंभ हो जाएंगे।