भूपतवाला और सप्तऋषि क्षेत्र संत बाहुल्य होने के बाद भी यहां के मतदान केंद्रों पर संतों की लाइनें नहीं दिखी। लंबी लाइन इस बार एक मात्र महिला सेवासदन कन्या इंटर कालेज मायापुर के मतदान केंद्र पर ही लगी।
भूपतवाला और सप्तऋषि क्षेत्र में श्री जगदेव सिंह संस्कृत महाविद्यालय, सप्तऋषि व अजरानंद अंधविद्यालय मतदान केंद्र बनाए गए थे। यहां सभी चुनाव में संतों की लंबी लाइनें लगती थी। महिला सेवासदन कन्या इंटर कालेज मायापुर मतदान केंद्र पर जरूर संतों की लाइन देखी गई। यहां अभा अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि के लाइन में लगकर लोकतंत्र के महापर्व में अपनी भागीदारी करते हुए वोट डाला। उत्तरी हरिद्वार के मतदान केंद्रों पर भारतमाता मंदिर, सप्तऋषि आश्रम, भूमा निकेतन, परमार्थ आश्रम, लालमाता मंदिर, चित्रकूट आश्रम, ब्रह्म निवास आश्रम आदि आश्रमों के दंडी महात्मा मतदान केंद्र पर देखने को नहीं मिले।
इक्का-दुक्का जो साधुसंत मतदाता पहचान पत्र लेकर वोट डालने पहुंचे भी उनका वोटर लिस्ट में नाम नहीं था। इन दोनों मतदान केंद्रों पर दंडी महात्मा की बहुत लंबी लाइन लगती थी। शहर से बाहर गए हजारों दंडी महात्माओं को राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों व आश्रमों के महंतों ने वोट डालने के लिए इस बार बुलाया नहीं और बिना बुलाए वे आए नहीं। संन्यास रोड कनखल क्षेत्र के मतदान केंद्रों पर भी साधु संतों की संख्या बहुत ही कम रही है। इसका कारण यह बताया जा रहा है कि आफ सीजन में दंडी साधु संत हरिद्वार में नहीं रहते हैं। जब किसी आयोजन के लिए उनकी जरूरत होती है तो उनके कोतवाल को बुलाया भेजना पड़ता है, परंतु इस बार भाजपा व कांग्रेस के प्रत्याशियों ने नोटबंदी के चलते उन्हें बुलाया नहीं।