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...तो एलइडी के रेट धड़ाम

Wed, 16 Dec 2015 12:03 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/हरिद्वार
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हरिद्वार। लगता है अब नगर निगम के अच्छे दिन आ गए हैं। पथ-प्रकाश के लिए एलइडी की खरीद में घोटाले के आरोपों से घिरने के बाद निगम ने सोमवार को एलइडी के टेंडर निकाले तो राहत महसूस की। जिन लाइटों को जनवरी और मार्च में टेंडर निकालकर खरीदा गया तो एक  72 वॉट की एलइडी 5325  रुपये में खरीदी थी, सोमवार को 80 वॉट की एलइडी का रेट मात्र 2595 रुपये में निकला है। इससे एक लाइट में निगम को 2729 रुपये का लाभ हुआ है।
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45 वॉट की एलइडी पहले 3465 रुपये में खरीदी उसका रेट अब 1980 रुपये, इसी तरह 25 वॉट की एलईडी पहले 1845 रुपये में अब उसे 1270 रुपये में खरीदा गया है। इससे उन सभासदों के आरोपों को बल मिला है जिन्होंने पहले के टेंडर के दामों को लेकर बोर्ड की दो बैठकों में एलइडी की खरीद में बड़ा घोटाला करने और ब्लैकलिस्टेड फर्म को ठेका देने का आरोप लगाकर हंगामा किया था। शिकायत की शासन स्तर पर जांच चल रही है। सोमवार को एलइडी के रेट गिरने से सभासद अब मिलीभगत करने में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। एलइडी की खरीद में बड़ा घोटाला करने का आरोप लगाने वाले भाजपा सभासद कन्हैया खेवड़िया ने कहा कि भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए शासन ने जांच के नाम पर लीपापोती की तो वह दोषियों को दंडित कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

घोटाला का भी होगा पर्दाफाश
नगर निगम में सोमवार को सार्वजनिक पथ प्रकाश के लिए एलइडी खरीद के लिए आए रेट से प्रदेश की निकायों में खरीदी लाखों रुपये की एलइडी के सौदे पर घोटाले का पर्दाफाश होने की संभावना है। शहरी विकास मंत्री प्रीतम सिंह पंवार ने पांच अक्तूबर को जांच के आदेश दिए हुए हैं। सभासद कन्हैया खेवड़िया की शिकायत पर भी जांच चल रही है। आरटीआई के जरिए एलइडी खरीदने में प्रत्येक नगर निकाय की खरीद रेट में बड़ा अंतर सामने आया था। निगम हरिद्वार ने जो 72 वॉट की एलइडी 5324 रुपये के रेट से खरीदी थी उसे नगरपालिका ऋषिकेश ने 19000 रुपये और 80 वॉट की 22720 रुपये के रेट से खरीदी थी, जिसका रेट सोमवार को 2595 रुपये आया है। इसी प्रकार पालिका मसूरी ने 72 वॉट की एक एलइडी 21593 रुपये से खरीदने का रिकार्ड बना रखा है तो पालिका मंगलौर ने 25 वॉट की एलइडी 69590 रुपये से खरीदी है। जबकि नगर निगम ने मार्च में इस लाइट को मात्र 1845 रुपये में खरीदा था और सोमवार को उसका रेट 1270 रुपये आया है। इसी प्रकार निगम हरिद्वार से शुरू और उजागर होना बताए जा रहे एलइडी खरीद में घोटाला बड़ा रूप लेने जा रहा है। इन नए रेटों से जांच करने वाले अधिकारियों को भी मदद मिलेगी।
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कॉकस तोड़ने से मिली सफलता
मेयर मनोज गर्ग ने बताया कि नगर निगम में लंबे समय से एक कॉकस बना हुआ था। उसे तोड़ने में सफलता मिली तो यह स्थिति सामने आई है। पहले आपस में मिलकर ठेकेदार टेंडर डाल देते थे लेकिन इस बार हम इनका पूल तोड़ने में कामयाब रहे। पहली बार एलइडी के 20, 25 टेंडर आए और 20 ने क्वालीफाई भी किया। इसके लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। पथ-प्रकाश के लिए अर्द्धकुंभ योजना में लगभग 2 करोड़ 25 लाख और 14वें वित्त आयोग से प्राप्त अनुदान से 50 लाख रुपये मिलाकर पथ-प्रकाश के लिए पौने तीन करोड़ रुपये के टेंडर हुए हैं। उन्होंने बताया 22 मीटर ऊंची हाईमास्ट लाइट के लिए 4 लाख 90 हजार रुपये और 11 मीटर ऊंची हाईमास्ट लाइट का रेट 87 हजार रुपये आया है।

मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश
हरिद्वार। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एलइडी लाइटों से संबंधित घोटाले की जांच वित्त विभाग के अधिकारियों से कराने के आदेश दिए हैं। मंगलवार देर शाम जनता की शिकायतों के संबंध में वीडियो कांफ्रेसिंग में शिकायतकर्ताओं से सीधे फोन पर वार्ता करते हुए सीएम ने इसे गंभीर विषय बताया और जांच कराने के आदेश दिए। मुख्यमंत्री ने ज्वालापुर निवासी अहसान अंसारी से भी वार्ता कर शत्रु संपत्ति खुर्द-बुर्द करने के मामले की जानकारी ली और इस प्रकरण की सीआईडी जांच कराने के आदेश दिए।
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