हरिद्वार। भारत साधु समाज की केंद्रीय कार्य समिति की बैठक में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए साधु संतों के नेतृत्व में रामालय ट्रस्ट बनाने का प्रस्ताव पास किया गया। बैठक में यह भी तय किया गया कि यही ट्रस्ट मंदिर का निर्माण करेगा। इसके अलावा मंदिरों में आने वाले चढ़ावा पर कोई टैक्स न लगाने, गोहत्या रोकने, स्कूलों में रामायण, गीता पढ़ाने, गंगा सहित अन्य नदियों पर प्रस्तावित बांधों के निर्माण रोकने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया।
मंगलवार को कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में भारत साधु समाज की केंद्रीय कार्य समिति की बैठक बुलाई गई थी। बैठक की अध्यक्षता द्वारिका एवं ज्योर्तिपीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज की। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करते हुए अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए रामालय ट्रस्ट बनाने और देश के साधु संतों को शामिल करते हुए राम मंदिर निर्माण के लिए आगे की रूपरेखा तैयार करने का प्रस्ताव पास किया गया। इससे अलावा गंगा सहित अन्य नदियों में बनने वाले बांधों के प्रस्तावों को निरस्त कराने के लिए प्रस्ताव पारित हुआ। संतों ने गोहत्या पर चिंता जताते हुए पूरे देश में गोहत्या के खिलाफ कानून बनाने और देसी गाय को अधिक महत्ता देने की मांग की। संतों ने देश में बढ़ते नशे के खिलाफ मुहिम चलाने और नशे के दुष्परिणाम बताते हुए दांपत्य जीवन को सुधारने को कहा। स्कूलों में गीता, रामायाण, महाभारत पढ़ाने के प्रस्ताव कराते हुए संतों का कहना था कि यदि युवा पीढ़ी को सीता अपहरण, द्रोपदी चीरहरण के बाद हुए संग्राम की जानकारी हो तो महिला उत्पीड़न न हो। संतों ने कश्मीर की समस्या, ब्राह्मण के शराब पीने को बड़ा अपराध, भ्रष्टाचार, खाद्य पदार्थों में मिलावट को संगीन अपराध बताया। इस मौके पर भारत साधु समाज के राष्ट्रीय प्रवक्ता ऋषिश्वरानंद, महामंत्री हरिनारायणानंद, परमार्थ निकेतन परमाध्यक्ष चिदानंद मुनि, डा. श्यामसुंदर दास, महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी, मीडिया प्रभारी ब्रह्मचारी रामानंद, स्वामी सुबोधानंद, अयोध्या से आए महंत अयोध्या दास, जितेंद्र दास, हरिओम दास, माधव दास, सुशील दास, कामताशरण, गोपाल दास, वृंदावन से बिहारी दास, सच्चिदानंद, हरेरामाचार्य आदि शामिल हुए।
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आरक्षण की व्यवस्था खत्म हो
द्वारिका एवं ज्योर्तिपीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने देश में आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने की मांग की। उन्होंने इसे एक संक्रमित बीमारी बताते हुए कहा कि यदि आरक्षण समाप्त हो जाए तो देश में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और अच्छे डाक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, अधिकारी आएंगे। वे व्यवस्था को भी बेहतर बनाएंगे, क्योंकि आरक्षण से किसी भी क्षेत्र में आया व्यक्ति कोई बेहतर कार्य नहीं कर सकता। उन्होंने दलित शब्द का ही विरोध किया और कहा कि देश में कोई भी दलित नहीं है। जो भी धर्म की पूजा करता है वे सभी समान हैं।