हरिद्वार। राजकीय प्राथमिक और उच्चतर स्कूलों में फर्नीचर खरीद में भारी अनियमितता सामने आने लगी है। जांच समिति ने कई स्कूलों में संपर्क किया तो सभी ने कंपनियों, बैंक, ग्राम प्रधान या स्वयं के स्रोत से फर्नीचर उपलब्ध कराने की बात बताई है। अधिकारियों की माने तो दो दिन की जांच में किसी भी स्कूल ने नहीं स्वीकारा है कि उन्हें उप खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से फर्नीचर उपलब्ध कराया गया है।
पिछले साल प्राथमिक शिक्षा विभाग से कक्षा एक से आठ तक के स्कूलों को फर्नीचर के लिए एक करोड़ 82 लाख 24 हजार 900 रुपये का बजट दिया था। मामले में शिकायतें आनी शुरू हुई तो मुख्य शिक्षा अधिकारी ने तीन अधिकारियों की समिति बनाई। समिति को 15 दिन में रिपोर्ट देनी है। इस मामले को जिलाधिकारी सी रविशंकर ने भी गंभीरता से लिया है। उन्होंने मुख्य शिक्षा अधिकारी डॉ. आनंद भारद्वाज को स्पष्ट निर्देश दिए है कि मामले में कोताही न बरती जानी चाहिए। अब समिति ने रुड़की और नारसन ब्लॉक के स्कूलों से जांच शुरू की तो सामने आया है कि स्कूलों के प्रधानाध्यापकों ने स्वयं के स्रोतों से फर्नीचर उपलब्ध कराया है। प्रधानाध्यापकों ने बताया है कि उन्होंने बैंकों, कंपनियों, ग्राम प्रधान, सामाजिक संस्थाओं के साथ क्षेत्र के संभ्रात व्यक्ति से बच्चों के हित में फर्नीचर लिया है। मुख्य शिक्षा अधिकारी डॉ. आनंद भारद्वाज ने बताया कि मामले में समिति जांच कर रही है।
---------------
यह है मामला
प्राथमिक शिक्षा निदेशक की ओर से वित्त वर्ष 2019-20 जनपद हरिद्वार के लिए पिछले साल 28 जून को उप शिक्षा अधिकारियों के अनुमोदन पर फर्नीचर मद के लिए मद संख्या 12 के तहत 16330500 (एक करोड़ 63 लाख 30 हजार 500) बजट जारी किया। इसके अलावा मॉडल स्कूलों के लिए पिछले साल ही 17 जुलाई को अलग से मद संख्या 42 के तहत 1894400 (18 लाख 94 हजार 400) बजट जारी किया था। बजट विकास खंडों के उप खंड शिक्षा अधिकारियों को आवंटित करते हुए उन्हें फर्नीचर खरीदकर स्कूलों में पहुंचाना था।