यूजीसी कानून के विरोध में सोमवार को स्वर्ण समाज के लोगों ने तहसीलदार एवं उपजिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजा। इस दौरान समाज के लोगों ने धरना-प्रदर्शन कर कानून को वापस लेने की मांग की।
अजय शर्मा ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति के आधार पर किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। सरकार को सभी छात्रों के हितों को समान रूप से ध्यान में रखते हुए नीतियां बनानी चाहिए। सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं के अधिकारों की अनदेखी करना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से यूजीसी कानून को वापस लेने की मांग की।
शमिक मिश्रा और सुबोध बंसल ने कहा कि अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक पहुंचा रहे स्वर्ण समाज के लोगों के साथ मारपीट जैसी घटना निंदनीय है। उन्होंने कहा कि यूजीसी कानून सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं के भविष्य के लिए चिंता का विषय है। शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी तरह की भेदभावपूर्ण नीति नहीं होनी चाहिए। श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक और बालकृष्ण शास्त्री ने कहा कि सरकार को स्वर्ण समाज की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। शिक्षण संस्थानों में दोहरी नीति लागू नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के अधिकारों को प्रभावित करने वाले किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस दौरान विकास अग्रवाल, सुबोध बंसल, रवि वर्मा, संजीव सिरोही, अमित आदि मौजूद रहे।