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हरिद्वार कुंभ : जूना अखाड़े की पावन छड़ी यात्रा शुरू, चारधाम जाएगी

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- श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े की ऐतिहासिक यात्रा को लेकर संतों में दिखा उत्साह
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- केदारखंड और मानसखंड के प्रमुख तीर्थों का भ्रमण कर कुंभ का भी जगाएंगे अलख
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े की ऐतिहासिक पावन छड़ी यात्रा का बुधवार को धर्मनगरी हरिद्वार में भव्य शुभारंभ हुआ। यह यात्रा उत्तराखंड के चारधाम सहित केदारखंड और मानसखंड के प्रमुख तीर्थों का भ्रमण करेगी। इसका उद्देश्य सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार, आध्यात्मिक चेतना का जागरण और राष्ट्रीय एकता का संदेश देना है।
सिद्धपीठ माया देवी मंदिर से यात्रा को रवाना किया गया। आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, कुंभ मेला अधिकारी सोनिका और अपर मेला अधिकारी दयानंद सरस्वती भी मौजूद रहे।
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हिमालय पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी वीरेंद्रानंद गिरि महाराज के नेतृत्व में यह यात्रा आगे बढ़ेगी। लगभग 70 साधु-संतों, नागा संन्यासियों और श्रद्धालु भक्तों का जत्था उत्तराखंड के लिए रवाना हुआ। जूना अखाड़े के वरिष्ठ सभापति श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रीमहंत महेश पुरी, श्रीमहंत केदारपुरी महाराज, महामंत्री श्रीमहंत शैलेंद्र गिरि और श्रीमहंत रामेश्वर गिरि सहित अनेक संत उपस्थित थे। सभी संतों ने पावन छड़ी की पूजा-अर्चना कर यात्रा की निर्विघ्न सफलता की कामना की।
जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता और सचिव श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि यह यात्रा सनातन धर्म की प्राचीन परंपरा का प्रतीक है। यह गुरु-शिष्य परंपरा, त्याग, तपस्या और भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक विरासत को जीवंत रखती है।
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यात्रा का मार्ग और उद्देश्य
पावन छड़ी उत्तराखंड के चारों धाम यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ जाएगी। यह केदारखंड और मानसखंड के समस्त पौराणिक तीर्थों का भी भ्रमण करेगी। इसमें सिद्धपीठ, शिवालय, शक्तिपीठ, ओम पर्वत और आदि कैलाश शामिल हैं। यात्रा का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म का प्रचार, आध्यात्मिक चेतना का जागरण और राष्ट्रीय एकता का संदेश देना है। इस यात्रा के माध्यम से सभी तीर्थों में कुंभ को लेकर चल रही तैयारी और भव्य दिव्य कुंभ दर्शन के लिए भी संत अलख जागाएंगे।
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