चंद्रमा मन का कारक है। मन को भटका कर दूर ले जाता है और वही पास भी ले आता है। मान्यता है कि यदि चंद्रमा वश में हो तो मन को भी वश में किया जा सकता है। परिवार में प्रेम पाने के लिए देश की करोड़ों महिलाएं बुधवार को इसी कामना के साथ उगते चंद्र को अर्घ्य प्रदान करेंगी।
इस बार चंद्रमा अत्यंत पवित्र माने जाएंगे। रोहिणी नक्षत्र में करवा चौथ के दिन आ रहे हैं। इस समय सूर्य अपनी निम्न तुला राशि में हैं, जबकि चंद्रमा अपनी उच्च वृष राशि में विराजमान हैं। ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को चंद्रमा पर अपने जनक सूर्य की निम्न राशि का कुछ प्रभाव पड़ता है। यह तब है कि जब वह अपनी उच्च राशि में आसीन है। चंद्रमा को बल प्रदान करने के लिए भारतीय स्त्रियां चतुर्थी के दिन व्रत रखकर चंद्रमा को जल प्रदान करती हैं। ऐसा करने से सूर्य के प्रभाव से प्रभावित हुआ चंद्रमा का उच्च बल अपने मूल पर लौट आता है। चंद्रमा चूंकि प्रेम के देवता हैं, अत: करवाचौथ के दिन उसका प्यार औरतों को पति के स्नेह के रूप में प्राप्त हो जाता है।
डा. मिश्रपुरी बताते हैं कि रोहिणी वास्तव में चंद्रमा की पत्नी है। करवा चौथ के दिन रोहिणी नक्षत्र में पड़ जाना ज्योतिषी इतिहास की एक बड़ी घटना है। धरती की पत्नियां अपने पतियों के साथ छत पर जाकर पूजा करती हैं तो रोहिणी भी पति चंद्रमा को पूजती है। इस दिन व्रत रखने का औरतों पर विशेष प्रभाव पड़ता है। इसी दिन राजा दशरथ ने शनि को रोहिणी भेदन से रोक दिया था। जब शनि रोहिणी का भेदन करता है तब धरती पर भीषण आपदा आती है। अत: करवा चौथ का दिन धरती के लिए भी पूर्णत: शुभ है। 19 अक्तूबर को चंद्रमा का उदय रात्रि 08:45 बजे हो जाएगा। इसी समय अर्घ्य देकर व्रत खोलना चाहिए।