महंगाई ने सरसों के तेल से दाल और सब्जी में लगने वाले तड़के के स्वाद को फीका कर दिया है। पॉमऑयल, वनस्पति घी, कच्ची घानी सरसों के तेल की कीमतों में हुई एकाएक वृद्धि ने रसोई का बजट बिगड़ गया है। बाजार में बिकने वाली कचौड़ी और पकौड़ी की लागत को बढ़ा दिया है। वहीं रसोई का बजट बिगड़ने से गृहिणियां खासी परेशान हैं।
पिछले कुछ दिनों में सरसों के तेल व रिफाइंड के दामों में जबरदस्त उछाल आया है। सरसोें तेल के दाम जहां प्रति लीटर 20 से 30 रुपये तक बढ़े हैं, वहीं, रिफाइंड भी 10 से 20 रुपये तक महंगा हो गए हैं। इस समय बाजार में सरसों का तेल 150 रुपये प्रति लीटर व रिफाइंड 125 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है।
सरसों के तेल में अचानक आए उछाल ने आम ग्राहकों की परेशानी बढ़ा दी है। किराने की दुकान पर जो ब्रांडेड सरसों का तेल 125 से 135 रुपये लीटर बिक रहा था, वह अब 140 से 150 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। ज्वालापुर थोक मंडी के तेल व्यापारी ने बताया कि सरसों और पॉम ऑयल में कभी इस तरह इजाफा नहीं हुआ।
लॉकडाउन के समय सरसों का तेल 100 से 120 रुपये लीटर था जो अब 150 रुपये तक पहुंच गया है। यही हाल रिफाइंड का भी है। रिफाइंड 100 से बढ़कर 125 रुपये प्रति लीटर के भाव से बिक रहा है। व्यापारियों का कहना है कि ओलावृष्टि के कारण सरसों की फसल को काफी नुकसान हुआ है। पैदावार घटने का असर बाजार पर दिखने लगा है।
सरसों के तेल के साथ रिफाइंड की खपत किचन में ज्यादा होती है। सरकार को इसके मूल्य पर नियंत्रण रखना चाहिए। यह गृहिणी की रसोई से सीधे जुड़े होने वाला सामान है।
- सोनिया खत्री, गृहिणी
दीपावली से लेकर अब तक सरसों के तेल व रिफाइंड के दामों में भारी बढ़ोत्तरी हुई है। इसने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। तेल व रिफाइंड के बढ़ते दामों पर अंकुश लगना चाहिए।
-संगीता अरोड़ा, गृहिणी
सरसों का तेल व रिफाइंड रसोई में सबसे जरूरी सामान है। पिछले कुछ दिनों से इसके दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं। सब्जी बनाने में अब देखभाल कर ही तेल व रिफाइंड का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
- रिशू चौहान, गृहिणी
पहले आलू-प्याज उसके बाद दालें और अब सरसों के तेल व रिफाइंड ने बजट को बिल्कुल बिगाड़ दिया है। रसोई का खर्च बहुत ही देखभाल कर करना पड़ रहा है।
- संजू चौहान, ग्रहणी