उत्तरी हरिद्वार में जनमुद्दों को लेकर दलीय प्रतिबद्धताओं से ऊपर उठकर राजनीति व सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने बेमियादी आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। नगर निगम की ओर से राजकीय हास्पिटल के निर्माण के लिए चयनित भूमि पर पावनधाम के सामने शुरू किए गए धरना-प्रदर्शन में पहले दिन साधु संतों ने मोर्चा संभाला।
कांग्रेस नेता मधुकांत गिरि गोस्वामी की ओर से मुद्दे उठाने पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पिछले साल 26 नवंबर को जनता दरबार में उत्तरी हरिद्वार में सरकारी अस्पताल बनवाने की घोषणा की थी। पिछले दिनों मनोज निषाद आदि ने भी मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने नगर निगम के अधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से नगर निगम के स्वामित्व की पावनधाम के सामने की भूमि उपयुक्त पाई थी। नगर निगम बोर्ड ने राजकीय अस्पताल के लिए भूमि देने का प्रस्ताव पारित कर आगे की कार्रवाई के लिए शासन को भेज दिया था। बावजूद इसके अब तक अस्पताल निर्माण की नींव नहीं रखी गई है। इससे क्षुब्ध सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने उत्तरी हरिद्वार विकास मंच का गठन कर विधानसभा का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को अस्पताल निर्माण सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास की मांग को घोषणा पत्र में शामल कराने के लिए बेमियादी धरना शुरू कर दिया है।
धरना स्थल पर हुई सभा में जूना अखाड़ा के राष्ट्रीय सचिव स्वामी देवानंद सरस्वती ने सरकारी हास्पिटल के साथ ही मोतीचूर रेलवे स्टेशन का विकास तथा सभी रेलगाड़ियों का स्टापेज और उच्च शिक्षा आदि सुविधाओं के लिए पंचपुुुरी षडदर्शन साधु समाज की ओर से आंदोलन का समर्थन किया। पार्षद अनिल मिश्रा ने क्षेत्र की समस्याओं के साथ आंदोलन की रूपरेखा प्रकाश डाला। महंत रामकिशोर दास, शिवदास दुबे, रवि चौहान, अर्पित चौहान, सुनील तिवारी, हरपाल धीमान, मोहन सती, मनीष चंद्र शर्मा, राकेश मिश्रा, सुभाष झा, बागेश्वर पांडेय, राजेंद्र रजावत, हिमांशु सरीन, विकल राठी, ओंकार पांडेय, हरीश शर्मा ने आंदोलन का समर्थन करते हुए धरना दिया।