मालूम हो कि कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गंगा से दो सौ मीटर के दायरे में निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी थी। इसलिए वर्ष 2016 में हरीश रावत सरकार ने एक अध्यादेश जारी कर हरकी पौड़ी पर बह रही गंगा को स्कैप चैनल घोषित कर दिया।
उस समय संत समाज और तीर्थ पुरोहितों ने अध्यादेश का विरोध किया था। 2017 में बीजेपी सरकार आने के बाद से लगातार संत और तीर्थ पुरोहित इस अध्यादेश को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। कुछ समय पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गंगा का नाम बदलने की गलती मानते हुए साधु संतों से माफी भी मांगी थी। उनका कहना था कि भाजपा सरकार को इस गलती में सुधार करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने दिया था आश्वासन
श्री गंगा सभा ने अध्यादेश के खिलाफ हाईकोर्ट में पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत कर सरकार को चुनौती देने की घोषणा की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अध्यादेश को जल्द से जल्द निरस्त करने का आश्वासन दिया था। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक भी कई बार तीर्थ पुरोहितों से मिलकर अध्यादेश को निरस्त करने का आश्वासन दे चुके हैं।