स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो 13 जुलाई तक जिले में कोविड जांचों की कुल संख्या 2624745 थी। 26 जुलाई को यह संख्या 2626652 पहुंची। यानी 13 दिनों में मात्र 1907 सैंपल हुए। औसतन प्रतिदिन 146 लोगों का सैंपल हुआ, जबकि कांवड़ से पूर्व सामान्य दिनों में हरिद्वार में 130 से 150 सैंपल रोजाना होते थे। कांवड़ शुरू होने से पहले हरिद्वार में एक्टिव केस सात थे, जो मेले के समापन पर 11 हैं। सैंपलिंग नहीं होने से नए मरीज नहीं मिल सके हैं।
हरिद्वार में अधिकतर परिवारों में लोग सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार और पेट खराब होने की समस्या से पीड़ित हैं। सामान्य वायरल के अलावा कोरोना के भी अधिकतर ऐसे ही लक्षण होते हैं। ऐसे में लोग परेशान हो रहे हैं लेकिन अस्पतालों में कोविड जांच की सुविधा बेहद सीमित है। स्थानीय लोगों में दहशत भी बनी है। कुंभ में स्थानीय लोग कोरोना का कहर झेल चुके हैं। लोग चाहकर भी अपनी कोविड जांच नहीं करवा पा रहे हैं। सरकार की नई एसओपी के बाद अब 28 जुलाई से सभी सरकारी अस्पतालों में कोविड टेस्टिंग करने और बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
मेला अस्पताल में जो भी मरीज कोविड टेस्ट करवाने स्वयं आ रहा था, उसकी जांच की जा रही है। कांवड़ मेले के दौरान अलग से कोई कोविड जांच की डेस्क नहीं बनाई गई थी।
- डॉ. राजेश गुप्ता, सीएमएस मेला अस्पताल
चिकित्सा स्टाफ कांवड़ मेला ड्यूटी पर था। मेला अवधि में अस्पताल में कोई भी कोविड टेस्ट नहीं किया गया है। 28 जुलाई से चिकित्सक से परामर्श के बाद मरीज कोविड टेस्ट करा पाएंगे।
- डॉ. चंदन राम मिश्रा, वरिष्ठ नेत्र सर्जन जिला अस्पताल
कांवड़ मेला खत्म हो गया। अब मेला, जिला अस्पताल और सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर कोविड की जांच की जाएगी। कर्मचारियों की कमी के चलते फिलहाल बॉर्डर चेक पोस्टों पर जांच केंद्र नहीं खोले जाएंगे। सरकार की एसओपी का पालन कराया जाएगा।
- डॉ. खगेंद्र कुमार, सीएमओ हरिद्वार