प्रदेश सरकार की ओर से घोषित गन्ना मूल्य को लेकर किसान खुश नहीं हैं। किसानों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के कारण यह बढ़ोतरी कम है। बढ़ती लागत के हिसाब से गन्ने के दाम कम से कम चार सौ होने चाहिए।
राज्य के गन्ना किसान सरकार की ओर से गन्ना मूल्य घोषित होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। सोमवार को सरकार की ओर से अगेती प्रजाति के लिए 355 रुपये प्रति कुंतल और सामान्य प्रजाति के लिए 345 रुपये प्रति कुंतल दाम घोषित किए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लगाए गए गन्ना तौल केंद्रों पर गन्ना बेचने वाले किसानों से भाड़े के रूप में काटे जाने वाले पैसों को भी प्रति कुंतल डेढ़ रुपये कम करके 11 की बजाय साढ़े नौ रुपये किया गया है। जबकि पिछले साल अगेती प्रजाति के लिए 327 और सामान्य प्रजाति के लिए 317 मूल्य घोषित किया गया था। सरकार उत्तर प्रदेेश से अधिक गन्ना मूल्य घोषित करने पर किसान हितैषी बताकर ढोल भी पीटने लगी है। जबकि किसान सरकार की ओर से घोषित किए गए गन्ने के दाम को नाकाफी बता रहे हैं।
गन्ना मूल्य लागत के अनुरूप कम है। गन्ने की पैदावार में लागत बहुत आ रही है। कम से कम गन्ना मूल्य चार सौ रुपये प्रति कुंतल होना चाहिए था।
- जितेंद्र उपाध्याय, लालढांग
बढ़ती मंहगाई और खेती केक खर्च को देखते हुए घोषित गन्ने का मूल्य कम है। गन्ने को तैयार करने में लागत इतनी आ रही है कि खर्च भी नहीं निकल रहे हैं।
- नीशू सैनी, रानी माजरा
सरकार की ओर से गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य कम घोषित किया है। सरकार को चाहिये कि गन्ना मूल्य बढ़ाकर किसानों को राहत दे।
- विनोद कुमार, नया गांव
गन्ने का मूल्य कम से कम 425 रुपये प्रति कुंतल होना चाहिए था। घोषित मूल्य महंगाई को देखते हुए नाकाफी है। सकार को गन्ने का मूल्य बढ़ाने चाहिए।
- अमरीश कुमार, बिशनपुर
गन्ने की फसल में डाली जाने वाली दवा और खाद की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इसको देखते हुए सरकार की ओर से घोषित गन्ने का मूल्य में बढ़ोतरी होनी चाहिए।
- कमलेश द्घिवेदी, रसूलपुर
भाजपा सरकार को किसानों की कोई भी चिंता नहीं है। गन्ने के दाम किसानों की मेहनत और लागत पर नहीं दिए गए हैं। कम से कम चार सौ रुपये प्रति कुंतल दाम घोषित करना चाहिए था।
- धर्मेंद्र प्रधान, कांग्रेसी नेता
गन्ना मूल्य का स्वागत करता हूं। लेकिन इकबालपुर शुगर मिल की ओर से अभी तक गन्ने का पिछले साल का भुगतान भी नहीं किया गया है। वह भी जल्द होना चाहिए।
- नरेंद्र सैनी, अहमदपुर
सरकार की किसान विरोधी नीतियों के चलते ही काश्तकार आंदोलन कर रहे हैं। किसानों को उम्मीद थी कि गन्ने का मूल्य चार सौ रुपये से अधिक होगा। सरकार की घोषणा से किसान निराश हुए हैं।
- सुब्बा सिंह ढिल्लो, दीनारपुर