नोटबंदी के बाद पहले से कैश की कमियों से जूझ रहे आम लोगों के साथ सरकारी कर्मचारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। महीने की पहली तारीख होने के बाद भी हजारों कर्मचारियों खाली जेब घर लौटे। जनपद के करीब 20 हजार सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह में तकनीकी पेंच फंसने के कारण 22 विभागों के कर्मचारियों के खातों में होने वाला 100 करोड़ से ज्यादा का भुगतान नहीं हो पाया। रिटायर्ड कर्मचारियों को पेंशन भी नहीं मिल पाई। शुक्रवार को वेतन और पेंशन जारी होने की उम्मीद जताई जा रही है।
केंद्र व राज्य सरकार के समस्त विभाग ई बैंकिंग से जुड़ने के कारण कर्मचारियों की तनख्वाह सीधे उनके खातों में जाती है। हर महीने की पहली तारीख को ट्रेजरी से तनख्वाह कर्मचारियों के खाते में पहुंचने में मिनटों का समय लगता है। रिटायर्ड कर्मचारियों को पेंशन का भुगतान भी इसी तरह किया जाता है। हरिद्वार ट्रेजरी से जनपद के 22 सरकारी विभागों के लगभग 20 हजार कर्मचारियों की तनख्वाह और रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन के रूप में 100 करोड़ से ज्यादा का भुगतान जारी किया जाता है।
इनमें पुलिसकर्मी, शिक्षक, चिकित्सक आदि सभी सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। हालांकि ट्रेजरी अधिकारियों की मानें तो उनके यहां से तो सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई थी लेकिन तकनीकी खामी के चलते वेतन जारी नहीं हो सका। मुख्य कोषाधिकारी रत्नेश कुमार ने बताया कि शुक्रवार को यह खामी दूर हो सकती है।
बैंक के चक्कर काटते रहे कर्मचारी
हर महीने की तरह इस बार पहली तारीख को खाते में तनख्वाह न पहुंचने पर कर्मचारी टेंशन में आ गए। जानकारी लेने के लिए कर्मचारी और रिटायर्ड कर्मचारी बैंकों के चक्कर काटते रहे। बैंक आकर पता चला कि इस बार तनख्वाह और पेंशन नहीं आई है तो उनकी चिंता और बढ़ गई।
बैंकों में ‘नो कैश‘ के नोटिस
नोटबंदी के 23वें दिन बृहस्पतिवार को बैंकों में कैश का टोटा रहा। हरिद्वार के अधिकांश निजी बैंकों ने गेट के बाहर ही नो कैश के नोटिस चस्पा कर दिए। भारतीय स्टेट बैंक में कैश जरूर मिला, लेकिन कमी को देखते हुए सिर्फ दो हजार रुपये ही दिए गए। लंबी लाइन में लगकर लोग जब बैंक के भीतर पहुंचे तो सिर्फ दो हजार रुपये मिलने की जानकारी पाकर वे ठगे से रह गए। बैंकों का कहना था कि जब कैश ही नहीं है तो भुगतान कैसे करें। वहीं एलडीएम केएस पॉल की मानें तो ये किल्लत अभी एक दो दिन और झेलनी पड़ सकती है। डिमांड भेजी गई है, कैश मिलने पर राहत जरूर मिलेगी।
नौकरी पेशा वर्ग में दिखी नाराजगी
अभी तक नोटबंदी के बाद असंगठित क्षेत्र के लोग ही बैंकों और एटीएम के बाहर लाइन में लगे हुए थे। पहली तारीख आने पर तनख्वाह आने का सिलसिला शुरू हुआ तो नौकरी पेशा वर्ग भी बैंक में पहुंचने लगे। खाते में तनख्वाह न आने या सिर्फ दो हजार रुपये निकलने पर नौकरीपेशा वर्ग के लोग नाराज दिखे। राजकीय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष हरेंद्र सैनी का कहना था कि नोटबंदी से पहले कैश की माकूल व्यवस्था करनी चाहिए थी। लोग अपने खातों से भी मेहनत का पैसा नहीं निकाल पा रहे हैं, ये सरासर उत्पीड़न है।
सिक्के न लेने पर बैंक के खिलाफ तहरीर
बड़े नोट बंद होने से बेहाल लोगों के लिए 10 के सिक्कों को लेकर बैंकों की स्थिति दावों से उलट है। बैंक के मनमाने रवैये से नाराज एक चाय विक्रेता ने पुलिस को तहरीर दी है। ज्वालापुर आर्यनगर चौक पर चाय की दुकान चलाने वाले कैथवाड़ा निवासी इरशाद का कहना है कि नजदीक के बैंक में उनकी चाय सप्लाई होती है। अक्सर भुगतान के तौर पर वह 10 रुपये के सिक्के उन्हें थमा देते हैं, लेकिन जब वह खाते में सिक्के जमा करने पहुंचे तो बैंक कर्मचारियों ने लेने से साफ इनकार कर दिया। मैनेजर ने भी हाथ खड़े कर लिए। कार्रवाई के लिए कोतवाली पहुंचे तो पुलिस का कहना था कि बैंक मैनेजर से सिक्के न लेने के संबंध में लिखित लेकर आइये।
आज पैसा आने की उम्मीद
लीड बैंक अधिकारी केएस पॉल ने बताया कि शुक्रवार को आरबीआई की ओर से कुछ पैसा आने की उम्मीद है। जिससे लोगों को राहत मिल सकती है। उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार को लोकल स्तर पर मैनेजमेंट करके पीएनबी के कुछ बैंकों में काम चलाया गया लेकिन अन्य बैंकों में भरी दिक्कत रही।