हरिद्वार जिले के सरकारी अस्पतालों में रैबीज वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कुत्ते और बंदर के काटने पर लोग निजी अस्पतालों में महंगा इलाज करवाना पड़ रहा है। सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन के अगले 15 दिनों तक आने की भी उम्मीद नहीं है।
किसी भी सरकारी अस्पताल में डेढ़ महीने से एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं है। ये वैक्सीन स्वास्थ्य महानिदेशक कार्यालय से सीएमओ को उपलब्ध कराई जाती है। जहां से अस्पतालों को वैक्सीन पहुंचाई जाती है। जिला अस्पताल में पहुंचने वाले पीड़ितों की बात करें तो यहां औसतन प्रतिदिन 10 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। अस्पताल में वैक्सीन नहीं होने से पीड़ितों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। रैबीज की वैक्सीन काफी महंगी होने से गरीब तबके के लोग अधिक परेशान हैं।
1500 रुपये में होता है कोर्स
निजी मेडिकल स्टोरों पर अलग-अलग कंपनियों की वैक्सीन मौजूद हैं। थोक में इसकी कीमत 250 से 310 रुपये तक है, लेकिन मेडिकल स्टोरों पर फुटकर में 300 से 350 रुपये तक बेची जा रही है। पीड़ित को वैक्सीन का पूरा कोर्स कराना पड़ता है। यह वैक्सीन पांच बार में लगवानी पड़ती है, जिसका कम से कम 1500 रुपये में पूरा कोर्स होता है। यदि पूरा कोर्स न करे तो रैबीज बीमारी होने का खतरा बना रहता है।
अधीक्षकों को अधिकार देने की तैयारी
प्रदेश में दवा टेंडर प्रक्रिया की शर्तें कठिन है। इससे स्थानीय स्तर पर कोई भी एजेंसी दवा सप्लाई के लिए टेंडर तक भर नहीं पा रही हैं। ऐसे में अस्पतालों में किसी भी मर्ज की दवा समाप्त होने पर अधीक्षक या सीएमएस अपने स्तर से दवा नहीं खरीद सकते।
एंटी रैबीज वैक्सीन समाप्त होने पर शासन और स्वास्थ्य महानिदेशक को अवगत कराया गया है। सभी जनपदों में एक जैसा हाल है। अब डीजी स्तर से अस्पतालों के अधीक्षकों को एंटी रैबीज वैक्सीन खरीदने के लिए अधिकार दिए जाने की प्रक्रिया के लिए प्रस्ताव किया जा रहा है।
- डा. बीएस जंगपांगी, सीएमओ, हरिद्वार।