शिक्षा विभाग इन दिनों परीक्षा कराने में मशगूल है। पहले चुनाव और उससे पहले अधिकारियों की अदला-बदली में शिक्षकों के कारनामे ठंडे बस्ते में डाल दिए गए। हाल ये है कि शिक्षकों के खिलाफ गंभीर मामलों की जांच भी आगे नहीं बढ़ पा रही है। कार्रवाई न होने से दागी शिक्षकों के हौसले बुलंद हैं। शासन के बड़े अफसरों के आदेश जिले के अधिकारियों और जिले के अधिकारियों के निर्देश ब्लॉक के अधिकारियों व दागी शिक्षकों के ठेंगे पर हैं। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रदेश में नई सरकार बनने पर देखने वाली बात यह भी होगी कि नए शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे जिले के शिक्षा विभाग को कितना दुरुस्त कर पाते हैं।
केस नंबर-1
बर्खास्त शिक्षकों से अभी तक रिकवरी नहीं
जनपद में बीते साल नवंबर माह में प्राइमरी शिक्षकों का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। जांच पड़ताल में शिक्षकों के बीटीसी और मूल निवास प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने पर आठ शिक्षकों को बर्खास्त किया गया और आठ शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया। बर्खास्त शिक्षकों से वेतन भत्तों की रिकवरी के आदेश बहादराबाद, लक्सर और खानपुर के उप खंड शिक्षा अधिकारियों को दिए गए। तत्कालीन डीईओ बेसिक रामेंद्र कुशवाहा व शासन के निर्देश के बावजूद डिप्टी बीईओ अभी तक रिकवरी नहीं करा पाए। वहीं पुलिस भी मुकदमे की फाइलों पर कुंडली मारकर बैठी हुई है।
केस नंबर-2
बाबूगिरी नहीं छुड़वा पा रहा विभाग
जिले के नगर क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी के बावजूद तमाम शिक्षक दफ्तरों में बाबूगिरी का काम देख रहे हैं। शासन ने विभाग को फटकार लगाते हुए एक हफ्ते में सभी शिक्षकों को वापस बुलाने के निर्देश दिए थे। विभाग कुछ शिक्षकों को ही स्कूल लाने में कामयाब रहा। अभी भी कोई शिक्षक चावल बांटने तो कोई चिट्ठी पहुंचाने के बहाने दफ्तरों में चिपके हुए हैं। विभाग ऐसे शिक्षकों से पार नहीं पा रहा है।
केस नंबर-3
एक ही स्कूल में जमे शिक्षक दंपति
कई स्कूलों में शिक्षक पति और पत्नी साथ कार्यरत हैं। स्कूल में घर जैसा माहौल होने के चलते पति-पत्नी आपस में तय करते हैं कि किस दिन किसको स्कूल जाना है और किसको घर संभालना है। बहादराबाद ब्लॉक के अलावा लक्सर और खानपुर में भी ऐसे कई शिक्षक दंपति है। पिछले दिनों खेल का खुलासा होने पर विभाग हरकत में आया था, तब कई शिक्षक दंपति ने रोजाना स्कूल जाना शुरू किया था। पर कार्रवाई न होने से अब फिर वैसे ही हालात हैं।
पुराने मामलों की जांच से जुड़ी फाइलें जल्द ही देखी जाएंगी। शिक्षकों के फर्जीवाड़े से जुड़े मामले की जांच कहां तक पहुंची है, इस बारे में डिप्टी बीईओ से जानकारी ली जाएगी। नियम तोड़ने की इजाजत किसी को नहीं है।
- जगमोहन सोनी, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक, हरिद्वार