हरिद्वार। शिक्षकों के फर्जीवाड़े के तार जाली दस्तावेज बनाने वाले गिरोह से जुड़े बताए जा रहे हैं। बर्खास्त 12 शिक्षकों में शामिल यूपी निवासी एक शिक्षक को कुछ साल पहले यूपी एसटीएफ ने जाली मार्कशीट, टीसी व नकली मुहर के साथ गिरफ्तार किया था। कई शिक्षकों के फर्जीवाड़े का मास्टर माइंड भी यही शिक्षक माना जा रहा है।
पूरे उत्तराखंड में भी शायद कभी इतनी बड़ी संख्या में सरकारी शिक्षकों का फर्जीवाड़ा पकड़ में आया हो, पर हरिद्वार जिले में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। वर्ष 2004-05 में भी जनपद के 20 शिक्षकों को फर्जीवाड़े के चलते नौकरी से निकाला गया था। इसके अलावा फर्जीवाड़े की अलग अलग जांच के दौरान भी कई शिक्षकों की पोल खुलने पर उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। खानपुर में तैनात कनखल निवासी एक शिक्षक का फर्जीवाड़ा भी कुछ साल पहले पकड़ में आया था। मगर इस बार फर्जीवाड़े में फंसे शिक्षकों की संख्या ज्यादा होने से तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि शिक्षकों ने फर्जी मार्कशीट से लेकर फर्जी डोमीसाइल बनवाए कैसे। क्या इसके पीछे जाली दस्तावेज बनाने वाले किसी गिरोह का हाथ है।
ऐसी संभावनाएं इसलिए भी जोर पकड़ रही हैं कि बर्खास्त शिक्षकों में एक शिक्षक पहले भी फर्जीवाड़े में फंस चुका है। इतना ही नहीं पड़ोसी जनपद के रहने वाले इस शिक्षक को कुछ साल पहले यूपी एसटीएफ ने जाली मार्कशीट, टीसी, लेटर पैड व नकली मुहर के साथ गिरफ्तार किया था। इस शिक्षक पर दो दर्जन से ज्यादा मुकदमे चल रहे हैं। माना जा रहा है कि इस शिक्षक ने ही अपने संपर्क के शिक्षकों के फर्जी दस्तावेज बनवाएं होंगे।
आरटीआई से भी हुए कई खुलासे
शिक्षकों का फर्जीवाड़ा खोलने में आरटीआई काफी मददगार साबित हुई है। खानपुर में तैनात रहे शिक्षक से लेकर कई फर्जीवाड़े आरटीआई से ही खुले हैं। सूत्र बताते हैं कि इनके अलावा कई अन्य शिक्षकों के दस्तावेज खंगाले जाएं तो बीटीसी की मार्कशीट से लेकर डोमीसाइल तक तमाम शिक्षकों के दस्तावेज फर्जी पाए जाएंगे। जिले में इतने बड़े पैमाने पर शिक्षकों का फर्जीवाड़ा पकड़ में आने से दस्तावेजों की गहनता से जांच अब जरूरी हो गई है।