हरिद्वार। नगर निगम की भूमि पर अर्द्धकुंभ योजना के तहत राज्य अतिथिगृह के निर्माण के विरोध का बोर्ड के प्रस्ताव का कोई असर नहीं हुआ। मेलाधिष्ठान ने मंगलवार से अतिथिगृह का निर्माण शुरू करवा दिया है। लेकिन काम रुकवाने के लिए निगम प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की। मुख्य नगर अधिकारी भी चुप्पी साधे रही।
शासन और मेलाधिष्ठान ने इसके निर्माण के लिए नगर निगम से एनओसी लेने तक की जरूरत नहीं समझी। क्योंकि यह भूमि सरकारी नजूल की है जिसके कस्टोडियन स्वयं जिलाधिकारी हैं। वह राज्य अतिथिगृह निर्माण के लिए पहले ही एनओसी दे चुके थे। इस संबंध में मुख्य नगर अधिकारी विप्रा देवी का कहना है कि यह सरकारी काम है इसलिए एफआइआर दर्ज नहीं करवाई जा सकती। बोर्ड ने भूमि हैंडओवर नहीं करने का प्रस्ताव पास किया था तो हमने भी भूमि हैंडओवर नहीं की है। उन्होंने कहा भूमि सरकारी नजूल की है। इसके कस्टोडियन स्वयं डीएम हैं और वह इसकी पहले ही एनओसी दे चुके हैं। जहां तक बोर्ड के प्रस्ताव का सवाल है इस संबंध में सचिव शहरी विकास, डीएम और महाप्रबंधक गढ़वाल मंडल विकास निगम को पत्र भेजकर अवगत करा दिया है।
गौरतलब है कि शासन ने अर्द्धकुंभ योजना में नगर निगम परिसर स्थिति एमएनए के आवासीय परिसर में खाली पड़ी भूमि पर लगभग 17 करोड़ रुपये की लागत से राज्य अतिथिगृह बनवाने का निर्णय लिया है। नगर निगम बोर्ड ने इसके विरोध में प्रस्ताव पास किया था। इसके बाद भी जब गढ़वाल मंडल विकास निगम ने पेड़ काट दिया तो नगर प्रमुख ने बदले में कुछ हासिल करने के लिए तत्कालीन मुख्य सचिव राकेश शर्मा से बात भी की और नगर निगम का सभागार बनवाने की मांग रखी। दोनों निर्माण कार्य साथ-साथ प्रारंभ कराने की शर्त रखी। मुख्य सचिव ने इसके लिए मेयर को आश्वासन भी दिया था लेकिन सभागार के लिए शासनादेश और धनराशि अवमुक्त करने का अभी तक कोई आदेश-निर्देश नहीं आया। जबकि राज्य अतिथिगृह का निर्माण शुरू हो चुका है।