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स्टार बन गए यतीश्वरानंद

Sat, 11 Mar 2017 09:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
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मुख्यमंत्री हरीश रावत को भारी बहुमत से हराने वाले स्वामी यतीश्वरानंद  रातों-रात स्टार बन गए। मतगणना स्थल पर जब उन्होंने सुना कि मुख्यमंत्री हरीश रावत पर उन्होंने 12 हजार वोटों से जीत दर्ज की है तो खुशी के साथ ही वे भावुक हो गए। सीधे समर्थकों के बीच गए और कहा कि वे हरिद्वार ग्रामीण की जनता के हमेशा आभारी रहेंगे। कहा कि वे क्षेत्र के विकास के लिए सदैव समर्पित रहे हैं तथा अब और भी ज्यादा जिम्मेदारी से काम करेंगे।

 स्वामी यतीश्वरानंद सुबह से ही मतगणना स्थल पर पहुंच गए थे। मतगणना के साथ ही उनके चेहरे के भाव बदल रहे थे। चौथे राउंड के बाद जब वे कांग्रेस प्रत्याशी हरीश रावत से करीब पांच हजार से ज्यादा वोटों से आगे थे तभी यह लगने लगा था कि वे चुनाव जीत सकते  हैं। अंतिम परिणाम आया तो स्वामी यतीश्वरानंद की खुशी उनके चेहरे पर साफ तैर रही थी। वे विकास भवन से निकले और सीधे जनता के बीच पहुंच गए। समर्थकों को गले लगाते हुए बोले कि जनता ने उन्हें जो आशीर्वाद दिया है उसे कभी भुला नहीं पाऊंगा। इस दौरान वे भावुक भी हो गए। समर्थकों ने उन्हें कंधे पर उठा लिया।
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बाद में पत्रकार वार्ता में स्वामी यतीश्वरानंद ने कहा कि मुख्यमंत्री हरीश रावत के चुनाव में धनबल का पूरा इस्तेमाल किया गया। चुनाव लड़वाने के लिए बाहर से लाए गए लोगों ने भोली भाली जनता को डराया, धमकाया तथा लालच देकर बहकाने की भी कोशिश की। बावजूद जनता ने साबित कर दिया कि वह महान है। कोई भी लालच और डराना काम नहीं आया। जनता ने अपने सेवक को चुना है। स्वामी यतीश्वरानंद ने कहा कि उन्होंने पिछले कार्यकाल में पूरे पांच साल जनता की सच्चे दिल से सेवा की और अब फिर पूरी निष्ठा से काम करेंगे। कहा कि वे चिकित्सा, शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं का विकास कराना उनकी प्राथमिकता है। युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए भी काम करेंगे। देर रात तक स्वामी यतीश्वरानंद लोगों से मिलकर आभार जताते रहे।

जमीन पर तो कहीं था ही नहीं रावत का चुनाव
परिणाम तो अब आया लेकिन हरीश रावत तो सही मायने में मतदान के दिन ही चुनाव हार गए थे। उनका चुनाव एक भी दिन धरातल पर ऐसा नहीं दिखा जिससे लगता कि हरीश रावत जैसा दिग्गज नेता चुनाव लड़ रहा हो। उनके चुनाव में जुटे लोगों ने स्थानीय कार्यकर्ताओं और जनता से तालमेल बनाने के बजाय काम बिगाड़ने में ज्यादा भूमिका निभाई।
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 हरीश रावत ने हरिद्वार ग्रामीण से चुनाव लड़ने का निर्णय तो बहुत बाद में किया था लेकिन करीब एक साल पहले से उनकी बेटी अनुपमा रावत यहां अपने आपको प्रत्याशी के रूप में प्रचारित कर सक्रिय थी। इसी दौरान अनुपमा और उनके सहयोगी कार्यकर्ताओं के आम जनता से व्यवहार को लेकर चर्चाएं होने लगी थी कि उनका तालमेल ठीक नहीं है। श्यामपुर पुलिस ने जब कांग्रेस के जिला महामंत्री गुरजीत सिंह लहरी पर गुंडा एक्ट लगाने का प्रयास किया और अनुपमा रावत के कार्यक्रम के दौरान ही लहरी को गिरफ्तार करने का प्रयास किया तो सारे कांग्रेसी अवाक रह गए थे। इसकी तीखी प्रतिक्रिया हुई थी और खुद कांग्रेस के बड़े नेता यह सवाल उठाने लगे थे कि आखिर ये कार्यकर्ता कैसे चुनाव लड़ाएंगे। चुनाव के दौरान भी अक्सर कार्यकर्ताओं के साथ रावत के सिपहसालारों के व्यवहार को लेकर चर्चा होती रहती थी । रावत का चुनाव भाजपा प्रत्याशी यतीश्वरानंद के मुकाबले कहीं धरातल पर नहीं दिखा। पूरे चुनाव  में कांग्रेस भाजपा से पीछे थी परिणामों ने भी यह साबित कर दिया।
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